ख़ुदा ख़ुदा करके

रूह को जिस्म से जुदा करके,
ख़ूब रोये यूँ......इब्तेदा करके,

यूँ भी रस्मन निबाह करना था,
ज़िन्दगी जी ख़ुदा-ख़ुदा करके,

क़द्र करके भी देखती दुनियां,
चाहते हम भी नाख़ुदा करके...
उर्मिला माधव..

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