ग़म नहीं
छूट जाएं आप तो कुछ ग़म नहीं,
हम, हमारी ज़िंदगी कुछ कम नहीं,
उम्र भर तन्हा रहे, पर क्या अजब,
देख लीजै आंख भी कुछ नम नहीं,
वक़्त था के आपको सुनते थे हम,
खोखली बातों में अब कुछ दम नहीं,
ग़म अकेले था हमारे नाम पर,
अब ये आलम है कि सब कुछ, हम नहीं...
उर्मिला माधव
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