मरहले बीमार के गए
उफ़ ज़िन्दगी के मरहले बीमार कर गए, ऐसा लगा कि ग़म का परस्तार कर गए, दामन में सिर्फ खार हैं.....पैरों में आबले, रस्ता बहुत कठिन था मगर पार कर गए , कुछ आरज़ू थी कुछ थे इरादे भी सख़्त ही, कुछ रास्ते के गम मुझे ख़ुद्दार कर गए , सब लोग क्या कहेंगे....यही डर बहुत रहा, क्या-क्या सुनेंगे हम जो अगर हार कर गए, किसको अज़ीज़ होगा ये मक़तल का रास्ता, किसको अज़ीज़ होगी कहो ये अजल की राह, हम से ही सिर फिरे हैं...जिगर वार कर गए ... उर्मिला माधव .