अच्छा सनम
मैं समझती थी उन्हें अच्छा सनम,
पर बुरे हैं वो बहुत,अल्ला क़सम...
चाहे जो कुछ पूछती रह जाऊँ मैं,
हंस दिए बस हो गया किस्सा ख़तम,
है ये मुमकिन दिल में कोई और हो,
ये अगर सच है तो होगा कितना गम,
मैंने जब भी बात की तो "मैं"से की,
क्या कहूँ अंदाज़ बस वो उनका "हम",
उनकी बाबत दिल कभी सोचे अगर,
दिल का हर दम ही हुआ है कोना नम...
#उर्मिलामाधव...
15.7.2015
Comments
Post a Comment