ग़ैरों से मिल गई देखो
दुनियां ग़ैरों से मिल गई देखो,
घर की बुनियाद हिल गई देखो,
शब की औक़ात मुख़्तसर ही थी,
ज़ख्म कितनों के सिल गई देखो..
ख़ूब शिद्दत से दिल को थामे रहे,
फिर हथेली भी छिल गई देखो,
एक ही दिन तो ग़ौर फ़रमाया,
जो नज़र लेके दिल गई देखो,
तीरगी अपने काम करती रही,
रौशनी फिर भी खिल गई देखो,
उर्मिला माधव,
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