इतनी सारी सीढियां

एक नज़्म..
देख लो ये उम्र भर की सीढियाँ हैं,
तुम भी गिनके इतनी सारी सीढ़ियां चढ़ लो
 तो आओ,

दुनियां भर की रास्ते में उलझनें,
और मुहैया हों न हरगिज़ सुलझनें,

रोते-धोते दिल मसलने का ज़रा कुछ माद्दा रख लो तो आओ,
तुम भी गिनके इतनी सारी सीढियां चढ़लो तो आओ,

चंद खुशियों को समझ कर ख़ैरियत,
ज़िन्दगी भर ज़िन्दगी से मांगनी है माज़रत,

और रिसते ज़ख़्म दामन में फ़ना कर लो तो आओ,
तुम भी गिनके इतनी सारी सीढियाँ चढ़ लो तो आओ,

रास्ते भर बेकसी और साज़िशों के मरहले,
सांस लेना मसअला फिर मसअले पर मसअले,

हर क़दम पर आंसुओं का हक़ अदा कर लो तो आओ..
तुम भी गिनके इतनी सारी सीढ़ियां चढ़ लो तो आओ,

मशवरा ये है हमारा ,ज़िन्दगी में रंग गढ़ लो,मुस्कुराओ,
याकि गिनकर इतनी सारी सीढियां चढ़ लो तो आओ....
उर्मिला माधव..

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