देखना क्या है
देखना है कि माजरा क्या है
किससे पूछें कि मुद्दआ क्या है
इसमें ख़ामोशियों का काम कहाँ
दरमयां दिल है फ़ासला क्या है
अब तो दिन भी गुज़र गए अपने,
ज़िन्दगी ख़त्म हौसला क्या है
अपना बिल्कुल जुदा नज़रिया था
बस तो फिर किससे राबता क्या है
अब ख़यालों में कोई कुछ भी नहीं
वक़्त अब मुझसे चाहता क्या है
उर्मिला माधव
Comments
Post a Comment