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Showing posts from June, 2025

एक शेर

ek sher... ख़ुद को थोड़ा बदल सको तो आधी रात चले आना, मेरी चाहत सिर्फ़ तुम्ही...हो खाली हाथ चले आना, ----------------------------------------------------- khud ko thodaa badal sako to aadhi raat chale aanaa, merii chaahat sirf tumhin ho,khaalii hath chale aanaa... उर्मिला माधव... 27.6.2014...

ख़ूब है

मेरी अपनी ज़िन्दग़ी मेरी नज़र में ख़ूब है, इसलिए हर रंग मेरा .मुझसे ही मंसूब है, आँख में काजल नहीं ऑ मांग में सुर्ख़ी नहीं, पर मुहब्बत का मुझे मालूम हर उस्लूब है , ये हकीक़त है के उसने आज पर्दा कर लिया, फिर भी मेरी ज़िन्दगी में एक वही महबूब है, जाने कितनी बाजियां जीती हैं मैंने उम्र भर  तुमने कैसे कह दिया के दिल मिरा मग्लूब है  मैं नमाज़ी हूँ मुझे हासिल हैं रब की नेमतें, लोग कहते हैं मिरा अंदाज़ ही मज्जूब है, #उर्मिलामाधव... उस्लूब--- रीति  मग्लूब---पराजित  मज्जूब--- वो संत जो देखने वालों के लिए बावला हो

बारिश

हमको बारिश का कब से रोना था, इतना मौसम ख़राब होना था? बर्ग ए गुल किस कदर उड़ा डाले, अपने गुलशन का नूर खोना था? इन दरख़्तों ने क्या बिगाड़ा था? सिर्फ़ पत्तों को साफ़ होना था?

होता कभी न था

Jo jo guzar gaya hai wo socha kabhi n tha, Jo aaj ho raha hai wo hota kabhi n tha, Ye raaste hi mujhko dilate hain yaad sab,  mazboot tha bahut dil, Rota kabhi n tha... #उर्मिलामाधव

ज़ाहिर है

ज़ाहिर है के दुखी नहीं हो पाती है, हैरत है क्यूँ आँख नहीं रो पाती है !! बरस कभी जो जाती है ये आँख अगर, खुशियों के ही मोती ये बरसाती है, ज़मीं यहाँ की बहुत-बहुत उपजाऊ है, मगर ...जह्र के बीज नहीं बो पाती है, हर मज़हब के लोग यहाँ पर रहते हैं, मेरे देश की मिट्टी सबको भाती है, हवा चमन की रंग रंगीली लगती है, कोयल जब भी मीठे स्वर में गाती है, पंछी की तो बन्धु कोई भी जाति नहीं, इनसानों को यही बात बतलाती है, परदेसी बन दूर देस जो रहते हैं, उन तक भी ये ख़ास खबर ले जाती है, जब गाती है कोयल जाकर कानों में, हर-हर गंगे गीत सुना कर आती है... उर्मिला माधव... 22.2.2014...

ज़लज़ले

ज़लज़ले आंखों में हरदम घूमते हैं, बस इसीकी तर्ज़ पर हम झूमते हैं, मुंतज़िर खुशियों के चाहे हम रहे हो पर ग़मों के हर क़दम हम चूमते हैं 

ग़म संभलता नहीं

ग़म संभलता नहीं क्या करूँ,क्या करूँ, चाँद ढलता नहीं क्या करूँ,क्या करूँ? एक नफ़स भी ख़ुशी का न तक़दीर में, ज़ोर चलता नहीं क्या करूँ,क्या करूँ? सूरत-ए-हाल किसको दिखाना अबस, दिन निकलता नहीं,क्या करूँ,क्या करूँ? #उर्मिलामाधव.. 16.6.2015

हम ख़्यालों से परे हैं

हम जहन्नुम से निकल कर आए हैं,बिलकुल खरे हैं, कुछ तो ऐसे ज़ख़्म हैं जो आज भी अब भी हरे हैं, इस क़दर हमने तपिश ख़ुर्शीद की बरदाश्त की है, ग़ैर मुमकिन है समझना…...जीते जी हैं या मरे हैं... वक़्त के यक़ता मनाज़िर देख कर हमने कहा,  सच बताना आईने क्या हम कभी तुझसे डरे हैं ? दिल खंगाला तो तुम्हे, कुछ वक़्त तो लग जाएगा, फिर भी इतना जान लोगे हम ख़यालों से परे हैं, उर्मिला माधव

आओ कभी

तुम ज़मीं पर,उतर के आओ कभी, अपनी जानिब नज़र घुमाओ कभी, तुम तो खुश फ़हमियों में जीते हो, अपनी कुछ ख़ामियाँ गिनाओ कभी  जिसको देखा बुरा कहा उसको, खुद पै भी उँगलियाँ उठाओ कभी, बस निगेटिव ख़याल रखते हो, ज़िन्दगी पौज़ीटिव बनाओ कभी, ज़ह्र बातों में घोल रखते हो, लफ़्ज़ शीरीं ज़रा मिलाओ कभी, बात अपनी गरज़ की करते हो, अय ज़रा दिल भी तो मिलाओ कभी,  #उर्मिलामाधव...

तीर आंखों से चलें

तीर आँखों से चलें, ख़ार -ए-गुलशन ही सही, जितने क़ातिल हों वहीं बज़्म में मारे जाएं,

इक दफ़ा तनहा हुए

हम भी अपनी ज़िंदगी में इक दफ़ा तनहा हुए, बाद उसके जाने क्या-क्या, क़ह्र फ़िर बरपा हुए, तय किया रोना बिलखना भूलना है अब हमें, हद हुई जब अश्क अपने जब जा-ब-जा रुसवा हुए, अब पलट कर देखने का होश ही बाक़ी न था, अच्छे ख़ासे लफ्ज़ भी हर गाम पर फ़तवा हुए, शर्म रख के ताक़ पर जब हो गए हम बे लिहाज़, बस ज़माने भर की ख़ातिर मुफ़्त का शिकवा हुए, अपनी तबियत पे हमेशा, एक चलन हावी रहा, सब तमाशा देख कर भी सब्र का हिस्सा हुए, उर्मिला माधव 15.6.2019

घर सावन हो जाता है

जब याद तुम्हारी आती है तो घर सावन हो जाता है, स्वर मुखर तुम्हारा होते ही मन वृन्दावन हो जाता है, क्या ह्रदय वेदना बतलाऊँ,अनुपस्थित रहना ठीक नहीं, जब मेरे सम्मुख नहीं हो तुम,एक सूनापन हो जाता है, तुमसे ही दीप्ति ह्रदय की है,तुम मेरे जीवन धन केवल, आभास तुम्हारा होते ही,घर,घर आँगन हो जाता है ... छवि मधुर तुम्हारी इतनी है,क्या जानूं कितनी है सीमा, जब प्रेम सहित वंदन करलूं यह घर पावन हो जाता है... बस गली-गली मैं घूम सकूँ,मुख चन्द्र तुम्हारा चूम सकूँ, यह ह्रदय कल्पना करले तो,सब मन भावन हो जाता है, उर्मिला माधव... 10.11.2014....

अब नहीं काटूंगी तुझको

अब नहीं काटूँगी तुझको,कसमसा कर ज़िन्दगी, चल तुझे अब रख रही हूँ,तह लगा कर ज़िन्दगी, ये जो इक तनहाई है ये क्या न कर डाले गज़ब, चाहे फिर ये रह ही जाए छटपटा कर ज़िंदगी, उर्मिला माधव 

पिन्हां हो गया

जिस्म में जब दर्द पिन्हां हो गया, सारा आलम ख़ास वीरां हो गया, हम सहम कर हो गए ख़ामोश से, वक़्त का अंदाज़ नाजां हो गया, उर्मिला माधव 

पानी पानी कब हुआ?

एक मतला २ शेर --- पाक-ओ-ताहिर दिल हमारा दिल का सानी कब हुआ? हमने ख़ालिस सच कहा,ये लनतरानी कब हुआ ? शबनमी पत्थर निचोड़ा,हमने अपने हाथ से, देख कर हैरत हुई, ये पानी-पानी कब हुआ ? हम अभी तक दिल के टुकड़े सूंघते रहते हैं बस, है धुंए की महक बाक़ी,पर कहानी कब हुआ? उर्मिला माधव... 11.6.2016

इन्हें क्या कहना

जिस्मो जाँ रूह तुझे प्यार करे है लेकिन ये बड़े ज़ब्त की बातें हैं इन्हें क्या कहना हर घड़ी शाम-ओ-सहर याद करे है लेकिन ये बड़े सब्र की बातें हैं इन्हें क्या कहना अपने जज़्बात बड़े शोर से ज़ाहिर करदूँ ये तो कुछ वक्त की बातें हैं इन्हें क्या कहना ये मेरी शायरी ये मेरे लिखे शेर-ओ-सुखन ये तो बस रफ्त की बातें हैं इन्हें क्या कहना          उर्मिला माधव

कड़ी धूप में

मैं कड़ी धूप में निकल जाऊं, अपनी मर्ज़ी से जाके जल जाऊं, जम के पत्थर सी हो गई हूँ ना, दिल ये करता है अब पिघल जाऊं, इस ज़माने से दूर जाने को, हर किसी शख्स से बदल जाऊं, बरसों खामोश रहके देख लिया, अब तो हर मुंह पै मुंह के बल जाऊँ, चलते चलते ही यूँ भी हो जाए, सबके सीने पै खाक़ मल जाऊँ.... #उर्मिलामाधव... 9.6.2015

चुका देते हैं

jalte rahne main bhi ek khaas sukun hota hai, hum bhi ab jaanke sholon ko hawa dete hain... hampe aansu ka bahut qarz abhi baaki hai, isko her haal main har roz chuka dete hain.. jo bhi ilzaam hain hum khud hi laga lete hain... tumko ham itni bhi zahmat se bacha dete hain, Urmila madhav... 7.6.2015..

दुबारा होगया

फिर वही किस्सा दुबारा होगया, दर्द से दिल पारा-पारा हो गया, हर घड़ी जो साथ मेरे था कभी, और की चाहत का मारा होगया, जो अना के साथ जीता था कभी, किस क़दर ये दिल बेचारा होगया, चाँद की मजमून सी थी ज़िन्दगी, अब महज़ टूटा सा तारा हो गया, सांस का चलना गनीमत जानियो, यूँ समझ लीजो गुज़ारा हो गया, उर्मिला माधव 

बिगड़ जाए

कोई मंज़र नहीं भाता,अगर तबियत उखड जाए, जो तुर्रम खां भी आ जाए,करेगा क्या,बिगड़ जाए, ये मेरी ज़िन्दगी अपनी,जिगर अपना,जहाँ अपना, उज़्र दारी यहाँ किसकी,के मेरी जां पै पड़ जाए ?? हज़ारों गर्दिशें झेलीं,ये जलते दश्त और बस मैं, उठाले हाथ दुनिया से,जो इस मुद्दे पे अड़ जाए, उठाया मुंह चले आये, वो मेरी कैफियत सुनने, कलेजा नोंच कर रख दूँ,कोई जो मुझसे लड़ जाए, मेरा तुम नाम मत लेना,अगर दामन बचाऊं तो, जिगर ये ताब रखता है,कि जब चाहे अकड़ जाए.... उर्मिला माधव 

मशहूर हो जाओ

मुहब्बत करने वालों के ज़रा मशकूर हो जाओ, वगरना यूँ करो अहबाब से बस दूर हो जाओ, अदब की बात करते हो,मुहब्बत करना भी सीखो, फिर उसके बाद चाहे जितना भी मशहूर हो जाओ, उर्मिला माधव