कड़ी धूप में
मैं कड़ी धूप में निकल जाऊं,
अपनी मर्ज़ी से जाके जल जाऊं,
जम के पत्थर सी हो गई हूँ ना,
दिल ये करता है अब पिघल जाऊं,
इस ज़माने से दूर जाने को,
हर किसी शख्स से बदल जाऊं,
बरसों खामोश रहके देख लिया,
अब तो हर मुंह पै मुंह के बल जाऊँ,
चलते चलते ही यूँ भी हो जाए,
सबके सीने पै खाक़ मल जाऊँ....
#उर्मिलामाधव...
9.6.2015
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