दुबारा होगया
फिर वही किस्सा दुबारा होगया,
दर्द से दिल पारा-पारा हो गया,
हर घड़ी जो साथ मेरे था कभी,
और की चाहत का मारा होगया,
जो अना के साथ जीता था कभी,
किस क़दर ये दिल बेचारा होगया,
चाँद की मजमून सी थी ज़िन्दगी,
अब महज़ टूटा सा तारा हो गया,
सांस का चलना गनीमत जानियो,
यूँ समझ लीजो गुज़ारा हो गया,
उर्मिला माधव
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