इन्हें क्या कहना
जिस्मो जाँ रूह तुझे प्यार करे है लेकिन
ये बड़े ज़ब्त की बातें हैं इन्हें क्या कहना
हर घड़ी शाम-ओ-सहर याद करे है लेकिन
ये बड़े सब्र की बातें हैं इन्हें क्या कहना
अपने जज़्बात बड़े शोर से ज़ाहिर करदूँ
ये तो कुछ वक्त की बातें हैं इन्हें क्या कहना
ये मेरी शायरी ये मेरे लिखे शेर-ओ-सुखन
ये तो बस रफ्त की बातें हैं इन्हें क्या कहना
उर्मिला माधव
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