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Showing posts from March, 2025

लोग गफ़लत में

लोग गफ़लत में बहुत उम्र बिता देते हैं, अपने जज़्बों को बहुत ख़ूब सज़ा देते हैं, हमसे दिलदार ही दुनियां में धुआं होके भी, ख़ाक लेते हैं ज़मीं पर से, उड़ा देते हैं,  ग़म ख़ुशी,मौत दुआ और हजारों मसले,  कुछ भी लिखते हैं हथेली पै,मिटा देते हैं, बात का रंग,ज़ुबां शीरीं,शहद के माफ़िक, अपने लफ़्ज़ों में मिला कर ही दुआ देते हैं, वक़्त आता है जबीं छू के निकल जाता है, हम ज़माने को फ़क़त हंस के दिखा देते हैं, #उर्मिलामाधव ...

सखावत आपकी

उम्र भर को चाहता है,दिल सखावत आपकी  ख़ास जो दरक़ार है वो बस इजाज़त आपकी,  दिल बहुत मजबूत है पर इस तरह हरगिज़ नहीं,  सर पै चढ़ कर बोलती है,जब अदावत आपकी,  आप कब समझे कभी ये इश्क़ की बारीकियां,  याद है हमको अभी तक हर शरारत आपकी,  जब भी जी चाहा, किसी इलज़ाम से नहला दिया,  सच के भी नज़दीक हो,जो हो शिकायत आपकी,  आपने देखा ही कब है,ज़िन्दगी का रंग-ए-रुख़,  जब ..उतर सकती है पल में ये हरारत आपकी.... उर्मिला माधव...  16.3.2016.

इतनी सारी आग कहां से लाते हो?

इतनी सारी आग कहाँ से लाते हो, बात-बात पे बेजा ही बल खाते हो कितनी सारी भीड़ भरी है दुनिया में, बे-मतलब तुम तनहा ही चिल्लाते हो, जो दुनिया ने किया, वहीं तुम आ पहुंचे, यार ग़ज़ब हो, अपना-अपना गाते हो 🤔 दुनिया भर का प्यार तुम्हीं को बख़्शा है, लौट-लौट कर तुम आंखें दिखलाते हो, उर्मिला माधव

मीज़ान तो देख

घर कितना वीरान तो देख, क्या-क्या है,सामान तो देख, क्या पैमाना सही ग़लत का, अय दुनियां मीज़ान तो देख, जिस पर बोझा लाद रहा है, उसकी पहले जान तो देख, लिए आईना फिरता है तो, ख़ुद अपना ईमान तो देख, किसे सज़ा दी,किसको बख्शा, भला-बुरा ...इनसान तो देख, फ़िक़्र करे है दुनियां भर की, पहले .....हिंदुस्तान तो देख, उर्मिला माधव, 23.3.2017

तबीयत के हुए

हम जहां को छोड़ कर अपनी तबीयत के हुए, कुछ न भूले जबसे हम पिछली अज़ीयत के हुए, हम हवा ए तुंद के झोंके से यां तक आ सके बस हवा के ज़ोर पर निकले उधर पहुंचे इधर आप बतलाऐं कि हम किसकी वसीयत के हुए, कौन थे वो लोग जो अपनी शरीयत के हुए हम ही थे जो इक निशाने, सबकी नीयत के हुए

इन आंखों ने देखे

इन आँखों ने देखे अंधेरे-उजाले, मुझे अब सभी रंग लगते हैं काले, भले चांदनी नूर छलकाए अपना, दिए रु-ब-रु चाहे जितने जला ले, नहीं रंग दूजा कोई अब समझना, मिरी आंख तू चारागर को दिखा ले, ज़माने को देदी खुली जब इजाज़त, चला ले कोई तीर तू भी चला ले, तो अब मैंने रब से भी ये कह दिया है, के तू भी चला जा, न मेरी बला ले, उर्मिला माधव

बस ख़ब्त होना चाहिए

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नई हो गई हूं

मैं ख़ुद से गुज़र कर नई हो गई हूं, सो ख़ुद के मुक़ाबिल खड़ी हो गई हूं, मैं इतनी मशक़्क़त से गुज़री हूँ आख़िर मुहब्बत की ख़ुद रौशनी हो गई हूं, ज़माने से लड़ना जो आया है मुझको, तो ये मत समझना बड़ी हो गई हूं, मगर ये भी सच है ग़लतियां बहुत थीं, सो अब थोड़ी-थोड़ी सही हो गई हूं, जो हो पारसा, बढ़ के आगे को आए, मैं गंगा सी पावन नदी हो गई हूं, उर्मिला माधव 18.3.2018

मुहब्बत किसीसे अगर हो ही जाए

मुहब्बत किसीसे अगर हो ही जाए , वो बस हादसा है करामत नहीं है , जो दिल आगया ग़र तुम्हारा किसीपे , तो फिर एक दिन भी सलामत नहीं है , अभी तक तो एक घर भी ऐसा न देखा , जहां दिल पे लानत मलामत नहीं है , फकीरी की चादर अगर मुंह पे ढक ली , तो कुछ भी ,गुज़रना क़यामत नहीं है.. '''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''' muhabbat kisise agar ho hii jaaye, wo bas haadsaa hai niyaamat nahin hai, jo dil aagayaa gar tumhaara kisiipe, to phir ek din bhi salaamat nahin hai, abhi tak to ek ghar bhi aisaa na dekhaa, jahaan dil pe laanat,malaamat nahin hai, faqirii ki chaadar agar munh pe dhak lii, to kuchh bhi guzarnaa qayaamat nahin hai.. उर्मिला माधव ... 25.8.2013

नज़्म दिल के कोने

दिल के कुछ कोने ऐसे हैं, जो बहुत...सलोने जैसे हैं, कुछ यादें बिलकुल ऐसी हैं, अब क्या बतलाऊं कैसी हैं, वो दामन बहुत सजीला था, मेरे अश्कों से.....गीला था, जो रूठ अगर वो गए कभी, लगते उदास तब फूल सभी, सब तार मिलन के टूट गए, अब जीवन भर को रूठ गए, उर्मिला माधव... १३.3.२०१४ ...

इबादत से अगरचे

इबादत से अगरचे हम.....बहुत मंसूब होजाएं, तो लाज़िम है ज़माने की नज़र में ख़ूब हो जाएं, किसी दिल में क़दम रखना भी कार-ए-पुख्ता कारा है, ज़रा नज़र-ए-इनायत हो......कि बस महबूब हो जाएं, हज़ारों जान से कुरबान होने पर भी क्या हासिल, मज़ा तो तब है जब हम .....दर्द के उस्लूब होजाएं, हम अब भी आज भी अपने जिगर में ताब रखते हैं, अगर जो ज़िदपे आजाएं...तो बस मतलूब हो जाएं... उर्मिला माधव 11.12.2013.. उस्लूब--- आचरण मतलूब---प्रेमी ibaadat se agarche hum bahut mansoob ho jaayen, to laazim hai zamaane ki nazar main khoob ho jaayen, kisi dil main qadam rakhna bhi kaar-e-pukhtaa kara hai, zara nazar-e-inaayat ho.......ki bas mahboob ho jaayen, hazaaron jaan se qurbaan hone par bhi kya haasil ?? maza to tab hai jab ham dard ke usloob ho jaayen, hum ab bhi,aaj bhi apne jigar main taab rakhte hain, agar jo zid pe aajaayen to bas.....matloob hojaayen... Urmila Madhav... 11.12.2013..

हम निरे

हम निरे अहसास से जूझा किये दिन रात बस, आपने जारी रखे,....अपने मुकम्मल घात बस, अब्र भी कुछ आदतन बस बर्क बरसाया किया, जानो दिल तनहा रहे कुछ था भी तो हालात बस, हम कभी समझे नहीं क्यूँ कर हसद था आपको, तज़किरा करते रहे क्यूँ बात और बेबात बस आप भी जब दोस्ती के नाम पर धब्बा रहे , झूठ सच के बलबले थे गम की थी इफरात बस कम जगह पड़ने लगी तो होगया हलकान दिल, दम-ब-दम बढ़ती रही सैलाब की तादात बस, इन बलाओं से .....कभी बचना हमें आया नहीं, झोंकते ही रह गए हम अपने सब जज़्बात बस, उर्मिला माधव... 13.3.2016 --------------------------------------------------- ham nire ahsaas se joojhaa kiye din raat bas, aapne jaari rakhe apne muqammal ghaat bas, Abr bhi kuchh aadatan bas barq barsaaya kiya, jism-o-jaan tanha rahe,kuchh thaa bhi to haalaat bas, ham kabhi samjhe nahin,kyunkar hasad tha aapko, Tazkiraa karte rahe kyun baat or be-baat bas, aap bhi jab dosti ke naam par dhabba rahe, jhuth sach ke balbale the,gam ki thi ifraat bas, in balaaon se kabhii bachna nahin aaya hamen, jhonkte hii rah gaye ham apne sab jazbaat...

हम कहां जिंदा बचे हैं

हम कहां ज़िंदा बचे हैं, आपके जाने के बाद,  ग़म का इक हिस्सा बने हैं  आपके जाने के बाद, कोई गर मिल जाये तो  हम मुस्कुरा लेते हैं बस, अश्क का दरया बने हैं  आपके जाने के बाद, उर्मिला माधव

जल नहीं पाया

टूटता दिल संभल नहीं पाया, तेरी दुनिया में चल नहीं पाया, कितने तूफ़ान और बवंडर थे, तन्हा ग़म से निकल नहीं पाया, कुछ तो होता चराग़ जलने से, क्या करें वो भी जल नहीं पाया, जिसकी हम जुस्तजू में निकले थे, इक सुकूँ का भी पल नहीं पाया, हम पे गर्दिश थी धूप की भारी, गोकि सूरज भी ढल नहीं पाया, गुफ्तगू हम किसीसे क्या करते, जब ये दिल तो बदल नहीं पाया, उर्मिला माधव 

सिलसिला

Silsila hai jo izterabon ka, iski aAdat hamen azal se hai, Itni oonchi chadhaAn naApi hai, Kya samajhte ho, kya ye kal se hai ? सिलसिला है जो इज़्तराबों का, इसकी आदत हमें अज़ल से है, इतनी ऊंची चढ़ान नापी है, क्या समझते हो क्या ये कल से है? उर्मिला माधव 

एक मुद्दत हुई है सोए हुए

एक मुद्दत हुई है सोये हुए, यूं ही बैठे हुए हैं खोये हुए, लोग मिलते ही पूछ देते हैं, आप लगते हैं ख़ूब रोए हुए, आप शिकवा फ़िज़ूल करते हैं, जिस्म के दाग़ तो हैं धोये हुए, उर्मिला माधव 

नींव का पत्थर

गुफ्तगू के दरमियां कल इक अजब किस्सा हुआ, नींव का पथ्थर लगा हमको बहुत खिसका हुआ, कशमकश में घूमते हम रह गए दीवानावार, रात भर हमने समेटा जब यकीं बिखरा हुआ, ज़िन्दगी भर के तजरिबे हर नफ़स हावी हुए, याद हम करते रहे तक़दीर का लिख्खा हुआ, लफ़्ज़ कुछ उसने कहे अपनी जुबां से यक़-ब-यक़, होश में था ही कहां उसका ज़ेहन बहका हुआ, अब यही बस देखना है, किस तरफ को रुख करें, कह गया हमसे बहुत कुछ कारवां छूटा हुआ, लौट कर हम आ गए अपने दर-ओ-दीवार में, दह्र के बाज़ार में जब दिल बहुत सस्ता हुआ, उर्मिला माधव

सब्र की लाश

है लाश मेरे सब्र की इसको उठाइये, गोया लिहाज़ कीजिये,वापस न जाइये, कितना तमाशा हो गया ,परदे में बैठ कर, छोटा सा काम कीजिये परदा उठाइए शिकवा करेगी किसलिए बरबादिये हयात, क्यों आप गुज़री बात का चरचा उठाइये, लाशा-ए-बे क़फ़न को सभी देखते हैं आज, कब तक यूं देखिएगा, जनाज़ा उठाइए... उर्मिला माधव 

अजब उदासी है

क्यूँ ये दिल में अजब उदासी है? मुझमें हिम्मत तो अच्छी ख़ासी है, Kyun ye dil me ajab udaasi hai, mujhmeN himmat to achhi khaasi hai, कैसे शिद्दत में कुछ कमी आई ? रूह तो अब तलक भी प्यासी है, Kaise shiddat me kuchh kamii aayi, Ruuh to ab talak bhi pyasi hai, ख़ूब लंबी है ज़िन्दगानी भी, लोग कहते हैं ये ज़रा सी है, Khoob lambi hai zindagani bhii, Log kahte hain ye zaraa sii hai, एक अरसा है,एक लम्हा भी, इसकी बस बानगी हवा सी है, Ek arsaa hai ek lamhaa bhii, Iskii bs baangi hawaa sii hai, राह क्या देखना मसर्रत की? गो के सदियों से ग़म शनासी है.... Raah kya dekhna masarrat kii, Go ki sadiyoN se gum shanaasi haI... उर्मिला माधव। ..... 2018

एक पल को मान जा

उम्र भर रूठा रहा है एक पल को मान जा,  कुछ न कुछ तो चाहिए है,मुस्कुराने के लिए,  रूठ जाने से हमारा दम निकल गर जाएगा,  कौन फिर आएगा तुझसे दिल लगाने के लिए,  यूँ तो होंगे हम हमेशा ज़िन्दगी के बाद भी,  कुछ नहीं होगा मगर फिर आजमाने के लिए,  तेरी आमद के लिए चल जान ही कुर्बान है,  कब्र पर तो आएगा चादर चढाने के लिए,  वो समां मदफन का होगा ये समझ ले बे-खबर,  तुझको रोना भी पड़ेगा,मुंह दिखाने के लिए...  कर चरागाँ क़ब्र को या मार ठोकर लौट जा,  कोई तो आ जाएगा शम्मा जलाने के लिए ....  #उर्मिलामाधव...

कुछ बयानात से

कुछ बयानात से कोई बात कहाँ बनती है, रूह को देर तक कुछ और खंगाला जाए, जिस्म सांचे में कई शक़्ल में ढल सकता है, जिंस-ए-किरदार को कुछ और संभाला जाए, उर्मिला माधव

तू जो भाया दिल को मेरे

दिल को भाया तू जो मेरे तुझमें देखा डूब कर, इतनी कालक थी वहां पर,लौट आये,ऊब कर, तेरी दुनियां तेरे हाथों सौंप कर हम चल दिए, और तुझसे कह दिया जो जी में आये ख़ूब कर.... पीठ करदी तेरी जानिब,ज़ख्म आगे कर लिए, दिल को समझाया अना का रास्ता मंसूब कर, पहले भी तू बेवफ़ा था,आज भी वो शक़्ल है, ये तेरे दिल का शगल है,नित नया महबूब कर, ज़िंदगानी उम्र भर जद्दोजेहद का नाम है, साहिबे ईमान हो जा,प्यार को उस्लूब कर...  उर्मिला माधव 2.3.2016

मसअला क्या है

Tum to kahte the ham nahin rote, Fir ye aankhon me zalzala kya hai? Tumko gairon se kuchh nahin lena, Ab ye bolo ke masalaa kya hai ? Bas ke chalna hai chalte rahte hain,  Ilm ye kab hai, marhalaa kya hai? उर्मिला माधव 

मोड़ कर देखिए

मुंह ज़रा मोड़ कर देखिये, आप ज़िद छोड़ कर देखिये, आप मुझसे बुरे भी हैं क्या ? आइये होड़ कर देखिये, अपनी टूटी हुई ज़िन्दगी, फिर ज़रा जोड़ कर देखिये, आप गर ख़ुद पे भारी हुए, कुछ अना तोड़ कर देखिये... कारसाज़ी है चौखट में क्या, ये तो सर फोड़ कर देखिये, उर्मिला माधव,

इस क़दर भारी पड़ा

इस क़दर भारी पड़ा, दुनियां का हर मंज़र मुझे, दश्त सा लगने लगा मेरा ही अपना घर मुझे, हादसों की हर नफ़स बरपा हुईं सर गर्मियां, क्या बताऊँ किस क़दर लगने लगा था डर मुझे, इक ख़ुशी को वक़्त कम था,ग़म में हम मसरूफ़ थे, अब बचा इक चैन जो दरकार था ,पल भर मुझे, यक़-ब-यक़ हंगामा-ए-ग़म, ख़ुद में पिन्हा हो गया, कर दिया घबराहटों ने बद से भी बदतर मुझे, उर्मिला माधव।

आब आब है

तिरछी अदा से बात का कहना सवाब है, कुछ भी सह्ल नहीं है, ज़माना ख़राब है, बच बच के चल रहे हो, कहाँ बच सके मगर, बेआबरू खड़े हो, यही इक जवाब है, जिस राह पर चले हैं तहम्मुल से आज तक, एहसास हो गया है यहीं इज़्तिराब है, जब तुन्द आंधियों से कभी हम नहीं डरे, सरमाया ज़िन्दगी का मगर, आब आब है, उनको गुमान तिफ़्ल हमें जानते हैं वो, दिल में हसद है मुंह पे मगर जी जनाब है, हम मुस्तहक थे फिर भी कभी कुछ नहीं कहा, अपना वजूद उनको फ़क़त इक हबाब है, उर्मिला माधव