जल नहीं पाया
टूटता दिल संभल नहीं पाया,
तेरी दुनिया में चल नहीं पाया,
कितने तूफ़ान और बवंडर थे,
तन्हा ग़म से निकल नहीं पाया,
कुछ तो होता चराग़ जलने से,
क्या करें वो भी जल नहीं पाया,
जिसकी हम जुस्तजू में निकले थे,
इक सुकूँ का भी पल नहीं पाया,
हम पे गर्दिश थी धूप की भारी,
गोकि सूरज भी ढल नहीं पाया,
गुफ्तगू हम किसीसे क्या करते,
जब ये दिल तो बदल नहीं पाया,
उर्मिला माधव
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