तबीयत के हुए
हम जहां को छोड़ कर अपनी तबीयत के हुए,
कुछ न भूले जबसे हम पिछली अज़ीयत के हुए,
हम हवा ए तुंद के झोंके से यां तक आ सके
बस हवा के ज़ोर पर निकले उधर पहुंचे इधर
आप बतलाऐं कि हम किसकी वसीयत के हुए,
कौन थे वो लोग जो अपनी शरीयत के हुए
हम ही थे जो इक निशाने, सबकी नीयत के हुए
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