सखावत आपकी

उम्र भर को चाहता है,दिल सखावत आपकी 
ख़ास जो दरक़ार है वो बस इजाज़त आपकी, 

दिल बहुत मजबूत है पर इस तरह हरगिज़ नहीं, 
सर पै चढ़ कर बोलती है,जब अदावत आपकी, 

आप कब समझे कभी ये इश्क़ की बारीकियां, 
याद है हमको अभी तक हर शरारत आपकी, 

जब भी जी चाहा, किसी इलज़ाम से नहला दिया, 
सच के भी नज़दीक हो,जो हो शिकायत आपकी, 

आपने देखा ही कब है,ज़िन्दगी का रंग-ए-रुख़, 
जब ..उतर सकती है पल में ये हरारत आपकी....
उर्मिला माधव... 
16.3.2016.

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