सब्र की लाश
है लाश मेरे सब्र की इसको उठाइये,
गोया लिहाज़ कीजिये,वापस न जाइये,
कितना तमाशा हो गया ,परदे में बैठ कर,
छोटा सा काम कीजिये परदा उठाइए
शिकवा करेगी किसलिए बरबादिये हयात,
क्यों आप गुज़री बात का चरचा उठाइये,
लाशा-ए-बे क़फ़न को सभी देखते हैं आज,
कब तक यूं देखिएगा, जनाज़ा उठाइए...
उर्मिला माधव
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