एक पल को मान जा
उम्र भर रूठा रहा है एक पल को मान जा,
कुछ न कुछ तो चाहिए है,मुस्कुराने के लिए,
रूठ जाने से हमारा दम निकल गर जाएगा,
कौन फिर आएगा तुझसे दिल लगाने के लिए,
यूँ तो होंगे हम हमेशा ज़िन्दगी के बाद भी,
कुछ नहीं होगा मगर फिर आजमाने के लिए,
तेरी आमद के लिए चल जान ही कुर्बान है,
कब्र पर तो आएगा चादर चढाने के लिए,
वो समां मदफन का होगा ये समझ ले बे-खबर,
तुझको रोना भी पड़ेगा,मुंह दिखाने के लिए...
कर चरागाँ क़ब्र को या मार ठोकर लौट जा,
कोई तो आ जाएगा शम्मा जलाने के लिए ....
#उर्मिलामाधव...
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