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Showing posts from March, 2024

गहराई दिखती है

तलातुम में खड़े हैं हम, हमें गहराई दिखती है, कहाँ तक जा रही है आपकी बीनाई, दिखती है, गुनहगारी का इक सिक्का, उन्हीं के नाम रख्खा है, कि जिन मैली निगाहों को फ़क़त रानाई दिखती है, कभी महफ़िल जमेगी तब वहीं सिक्का उछालेंगे गिरेगा बस वहीं जाकर, जहां शहनाई दिखती है, हमें जब नींद आती है तो सब कुछ भूल जाते हैं, कि नीयत होगई है ख़ाब की हरजाई दिखती है. कभी हंसने को जी चाहा, तो जलवा, देख लेते हैं कहाँ किस-किसने की है हौसला अफ़ज़ाई दिखती है.. #उर्मिलामाधव

देख तमाशा दुनिया का

गर वक़्त बदल ले नज़र कभी, काली हो  शहर में सहर कभी, मिल जाए हवा में ज़हर कभी, जारी हो मुसलसल क़हर कभी, पर एक जगह रुक जाना नहीं , हालात से बस घबराना नहीं, इलज़ाम किसी पै लगाना नहीं, देना है समझ ले पाना नहीं, तूफ़ान छुपा रख गिरया का, फिर देख तमाशा दुनिया का, फिर देख तमाशा दुनिया का..... उर्मिला माधव...

शिकस्ता जिस्म

शिकस्ता जिस्म लेकर ही जो चलना है तो चल लेंगे, अगर मुमकिन नहीं होगा तो दुनियाँ से निकल लेंगे, ज़रुरत क्या हमें सोचें कोई माज़ी ऑ मुस्तकबिल, दुआ के वास्ते हरगिज़ न हाथों में रहल लेंगे, क़दम दो चार भी चलना अगर हमको हुआ मुश्किल, किसी चिकनी सतह पर पाँव रख्खेंगे फिसल लेंगे, कभी जब ला मकां से लाएगा कासिद तलब नामा, करेंगे दस्तखत फ़ौरन, कहेंगे क्यूँ कि कल लेंगे, कहीं ख्वाहिश बची होगी, पलट कर लौट आने की,  किराया ज़िंदगी देकर नया फिर घर बदल लेंगे, उर्मिला माधव

बस दुआ ही चाहती है

मुझपे बस काबिज़ हुआ ही चाहती है, एक शै जो सिलसिला ही चाहती है, मैं खरी उतरूं अबस ,उम्मीद पर, वो मेरा हरदम बुरा ही चाहती है, मैं कड़े फिकरों से गुजरूँ,रात दिन, अपने हक में बस दुआ ही चाहती है, मैं गुज़रती हूँ, हज़ारों तन्ज़ से पर ज़ख्म दिल के वो छुआ ही चाहती है, मैंने भी बाज़ी रखी,उस ज़ीस्त पर, खेलना जो बस जुआ ही चाहती है... उर्मिला माधव ...

वीरान तो देखें

घर कितना वीरान तो देखें क्या-क्या है,सामान तो देखें क्या पैमाना सही ग़लत का, सब मिलके मीज़ान तो देखें जिस पर बोझा लाद रहे हैं, उसकी पहले जान तो देखें लिए आईना फिरते हैं तो, ख़ुद अपना ईमान तो देखें किसे सज़ा दी,किसको बख्शा, भला-बुरा ...इनसान तो देखें फ़िक़्र करें हैं दुनियां भर की, पहले .....हिंदुस्तान तो देखें... उर्मिला माधव..

वीरान तो देख

घर कितना वीरान तो देख, क्या-क्या है,सामान तो देख, क्या पैमाना सही ग़लत का, अय दुनियां मीज़ान तो देख, जिस पर बोझा लाद रहा है, उसकी पहले जान तो देख, लिए आईना फिरता है तो, ख़ुद अपना ईमान तो देख, किसे सज़ा दी,किसको बख्शा, भला-बुरा ...इनसान तो देख, फ़िक़्र करे है दुनियां भर की, पहले .....हिंदुस्तान तो देख, उर्मिला माधव..

ख़ुद्दार कर गए

उफ़ ज़िन्दगी के मरहले बीमार कर गए, ऐसा लगा कि ग़म का परस्तार कर गए   दामन में सिर्फ ख़ार हैं.....पैरों में आबले, रस्ता बहुत कठिन था मगर पार कर गए , कुछ आरज़ू थी...कुछ थे इरादे बहुत बड़े , कुछ रास्ते के ग़म मुझे ख़ुद्दार कर गए , सब लोग क्या कहेंगे....यही डर बहुत रहा, क्या-क्या सुनेंगे हम जो अगर हार कर गए, किसको अज़ीज़ होगी कहो ये अज़ल की राह, हम से ही सिर फिरे हैं...जिगर वार कर गए ...  उर्मिला माधव ...

बड़ी हो गई हूं

मैं ख़ुद से गुज़र कर नई हो गई हूं, सो ख़ुद के मुक़ाबिल खड़ी हो गई हूं, मैं इतनी मशक़्क़त से गुज़री हूँ आख़िर मुहब्बत की ख़ुद रौशनी हो गई हूं, ज़माने से लड़ना जो आया है मुझको, तो ये मत समझना बड़ी हो गई हूं, मगर ये भी सच है ग़लतियां बहुत थीं, सो अब थोड़ी-थोड़ी सही हो गई हूं, जो हो पारसा, बढ़ के आगे को आए, मैं गंगा सी पावन नदी हो गई हूं, उर्मिला माधव

ज़ब्त करना

ज़ब्त करना भी एक मशक्क़त है, वास्ते दिल के यूँ ही मेहनत है, जाने किससे किधर ये टकराये, आँख उठना भी एक क़यामत है, जो भी ठुकराए उसपै मर जाए, दिल की बेजा हक़ीर हरक़त है, उर्मिला माधव... 17.3.2014

ताक पर

अब यही हालात हैं,तहज़ीब रक्खी ताक पर, रंग में कालक मिलाई और घुमाया चाके पर  दिल में लाखों मैल लेकर,दिल मिलाने आगये, बे-हयाई का चलन है समझें हैं बेबाक पर.... अब वो रंगा-रंग जैसा होलियों का रंग कहाँ, रंग थे होली के गाढ़े,दिल बहुत शफ्फाक,पर .... वो सुरीले फाग के रंग वो मुग़न्नी अब कहाँ, कौन है बाक़ी मुनक़्क़ीद,ख्वाहिशे,मुश्ताक पर, लोग जो जीते थे,ज़ात-ए-किब्रिया के वास्ते, जान दे जाते हैं आख़िर अब हुजूम-ए- शाक पर.... अब जुबां का बंद रखना,वक़्त को दरकार है, तज़किरा करना ही क्या अब,हालत-ए-नापाक पर, इस तरह दामन बचाना,शोहदों के हाथ से रंग तुम लगने न देना,"महजबीं" पोशाक पर #उर्मिला माधव.... 14,3,2016 शाक़--- मुश्किल  मुनक़्क़ीद---कद्रदान  मुश्ताक़-----अभिलाषी,उत्सुक मुग़न्नी----- गायक

मन लगाने दीजिए

फ़र्क़ क्या है,दिल दुखाने दीजिये, ग़म,ख़ुशी,जो भी हो, आने दीजिये, आप जो हैं,बस हमेशा हों वही, सबको अपनी ज़िद निभाने दीजिये, आप अपनी हद में हों महदूद बस, वक़्त को ही आने-जाने दीजिये, ख़ुद पे जो तनक़ीद हो,सुनते रहें, सबको अपना मुंह थकाने दीजिये, मुद्दआ कोई भी हो बस चुप रहें, दूसरों को सर खपाने दीजिये, हो बहुत बर्दाश्त से बढ़के अगर, दिल को जबरन मुस्कराने दीजिये... क्यों उलझना,दुश्मनों से रायगाँ ? महफ़िलें उनको सजाने दीजिये, जो बेचारे अक़्ल से मजबूर हैं, उनको अपना मन लगाने दीजिये, उर्मिला माधव...

हसरतों के साथ

अब बस मुक़ाबला है मेरा हसरतों के साथ, लिखते रहे न भेजे कभी,उन खतों के साथ, खोली दराज़ जब भी नज़र आये वो ही ख़त, रख्खे हुए हैं कब से बड़ी वुसअतों के साथ, जिस आग में जला वो कभी खुश हुए बहुत, ख़ुद भी सुलग रहे हैं,उन्हीं फितरतों के साथ, उर्मिला माधव... 7.3.2014....

बदलना है

धूप को रोज़ ही निकलना है और कुछ दूर साथ चलना है कोई शिकवा नहीं करे कोई सब्र के साथ बस पिघलना है बस किसी दौर से न घबराएं अपनी रफ़्तार को बदलना है

देख आ हम तुझे बताते हैं

Dekh aA hum tujhe btaate hain, Kis tarah paaNv ladkhdaate hain, Jab zammiN zaar zaar roti hai, AasmaaN toot toot jaate hain, Ghum.se dil baith-baith jaataa hai, Aankh jub rahnumaaN churaate hain, Aah waalon kii kaun sunta hai, Raabite banke toot.jaate hain, Zindagi khalvaton se ladtii hai Jan o dil ghum me doob jaate hain, PaaaNv aise hii ladkhdaate hain Urmila Madhav

दूर से देखें

बुरा लगता है ज़ाहिर है, किसीको घूर के देखें, सो अपना फ़ैसला ये है कि दुनियां दूर से देखें, जिन्हें हम ख़ाब की सूरत में अक्सर देख पाते हैं ये सब ग़ैबी जहां से हैं, इन्हें दस्तूर से देखें, किसी सूरत प क्या जाना, सभी तो एक जैसी हैं, अगर कुछ देखना ही है, नज़र के नूर से देखें.. बड़ी हैरत है आंखों में अभी तक गिर्यादारी है, समझना है अगर ग़म को तो ग़म मजबूर के देखें. Urmila Madhav

अजनबी सी

ये दिल ढूँढता है जगहा अजनबी सी, हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी, कभी ज़िंदगी में ये दिन भी दिखाना, के हर सम्त इक अजनबी रंग लाना, ज़मीं अजनबी,आसमां अजनबी हो, कोई शख्स हो रु-ब-रु,अजनबी हो, लगे जिसकी हर इक अदा अजनबी सी, हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी..... हथेली पे कुछ नाम हों अजनबी से, पढ़े ही न जाएँ,पढ़ें हम कहीं से, मिले जो बशर वो बशर,अजनबी हो, सुनो मुख़्तसर,कुल दह्र अजनबी हो, मिले दर्द-ए-दिल को दवा अजनबी सी, हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी... उर्मिला माधव ... 4.3.2016...

इस क़दर बेज़ार हूँ

ज़िन्दगी की तल्खियों से इस क़दर बेज़ार हूँ, मारने-मरने की हद तक पुश्त-ओ-पा खूंखार हूँ, आये महफ़िल में चुकाने,आपसे बाकी हिसाब, आपको ख़ामा-ख़याली है कि मैं ग़म-ख़्वार हूँ, वक़्त वो कुछ और था जब घर हमारा था कहीं, आओ इस्तकबाल है कि अब महज इक दार हूँ, फैसला करने की नौबत है तो फिर क्या देर है,  हूँ मुक़ाबिल आपके शम्स-ओ-क़मर,तैयार हूँ, उर्मिला माधव... 2.3.2014..

देखा डूब कर

दिल को भाया तू जो मेरे तुझमें देखा डूब कर, इतनी कालक थी वहां पर,लौट आये,ऊब कर, तेरी दुनियां तेरे हाथों सौंप कर हम चल दिए, और तुझसे कह दिया जो जी में आये ख़ूब कर.... पीठ करदी तेरी जानिब,ज़ख्म आगे कर लिए, दिल को समझाया अना का रास्ता मंसूब कर, पहले भी तू बेवफ़ा था,आज भी वो शक़्ल है, ये तेरे दिल का शगल है,नित नया महबूब कर, ज़िंदगानी उम्र भर जद्दोजेहद का नाम है, साहिबे ईमान हो जा,प्यार को उस्लूब कर...  उर्मिला माधव 2.3.2016

मसअला क्या है

Tum to kahte the ham nahin rote, Fir ye aankhon me zalzala kya hai? Tumko gairon se kuchh nahin lena, Ab ye bolo ke masalaa kya hai ? Bas ke chalna hai chalte rahte hain,  Ilm ye kab hai, marhalaa kya hai? उर्मिला माधव