मन लगाने दीजिए
फ़र्क़ क्या है,दिल दुखाने दीजिये,
ग़म,ख़ुशी,जो भी हो, आने दीजिये,
आप जो हैं,बस हमेशा हों वही,
सबको अपनी ज़िद निभाने दीजिये,
आप अपनी हद में हों महदूद बस,
वक़्त को ही आने-जाने दीजिये,
ख़ुद पे जो तनक़ीद हो,सुनते रहें,
सबको अपना मुंह थकाने दीजिये,
मुद्दआ कोई भी हो बस चुप रहें,
दूसरों को सर खपाने दीजिये,
हो बहुत बर्दाश्त से बढ़के अगर,
दिल को जबरन मुस्कराने दीजिये...
क्यों उलझना,दुश्मनों से रायगाँ ?
महफ़िलें उनको सजाने दीजिये,
जो बेचारे अक़्ल से मजबूर हैं,
उनको अपना मन लगाने दीजिये,
उर्मिला माधव...
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