वीरान तो देख
घर कितना वीरान तो देख,
क्या-क्या है,सामान तो देख,
क्या पैमाना सही ग़लत का,
अय दुनियां मीज़ान तो देख,
जिस पर बोझा लाद रहा है,
उसकी पहले जान तो देख,
लिए आईना फिरता है तो,
ख़ुद अपना ईमान तो देख,
किसे सज़ा दी,किसको बख्शा,
भला-बुरा ...इनसान तो देख,
फ़िक़्र करे है दुनियां भर की,
पहले .....हिंदुस्तान तो देख,
उर्मिला माधव..
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