देख तमाशा दुनिया का
गर वक़्त बदल ले नज़र कभी,
काली हो शहर में सहर कभी,
मिल जाए हवा में ज़हर कभी,
जारी हो मुसलसल क़हर कभी,
पर एक जगह रुक जाना नहीं ,
हालात से बस घबराना नहीं,
इलज़ाम किसी पै लगाना नहीं,
देना है समझ ले पाना नहीं,
तूफ़ान छुपा रख गिरया का,
फिर देख तमाशा दुनिया का,
फिर देख तमाशा दुनिया का.....
उर्मिला माधव...
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