बदलना है

धूप को रोज़ ही निकलना है
और कुछ दूर साथ चलना है

कोई शिकवा नहीं करे कोई
सब्र के साथ बस पिघलना है

बस किसी दौर से न घबराएं
अपनी रफ़्तार को बदलना है

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