दूर से देखें


बुरा लगता है ज़ाहिर है, किसीको घूर के देखें,
सो अपना फ़ैसला ये है कि दुनियां दूर से देखें,

जिन्हें हम ख़ाब की सूरत में अक्सर देख पाते हैं
ये सब ग़ैबी जहां से हैं, इन्हें दस्तूर से देखें,

किसी सूरत प क्या जाना, सभी तो एक जैसी हैं,
अगर कुछ देखना ही है, नज़र के नूर से देखें..

बड़ी हैरत है आंखों में अभी तक गिर्यादारी है,
समझना है अगर ग़म को तो ग़म मजबूर के देखें.
Urmila Madhav

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