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Showing posts from November, 2021

जहां हूं मैं

सब ये कहते हैं, बे अमां हूँ मैं, फ़िर भी महफूज़ हूँ,जहां हूँ मैं, ख़ुद को ज़ाहिर नहीं किया मैंने, दुनियां कहती है इक ज़बाँ हूँ मैं, न तो पर्दों का इस्तेमाल किया, और न सोचा के कब कहां हूँ मैं, मेरी नज़दीकियां हुईं महसूस, क्योंकि हर दिल के दरम्यां हूँ मैं, फिर भी इल्ज़ाम हो तो हाज़िर हूँ, अपने घर के सिवा कहां हूँ मैं? मेरा दुश्मन नहीं कोई अब तक, क्यूंकि हर शय पे ही अयाँ हूँ मैं, नक्श पा मिट गए ये फ़िक़्र नहीं, तनहा तनहा भी कारवां हूँ मैं.... उर्मिला माधव
ज़ख़्म जब तक ख़ासकर रिसता नहीं है, वो किसी को उम्र भर दिखता नहीं है... आप जब चाहें मुसीबत मोल लेलें, बस सुकूँ ही, हाट पर बिकता नहीं है.. ग़म जिगर की आंच पर सिकता नहीं है

पहले भी नहीं थे

आप मेरे साथ पहले भी नहीं थे, बाद इसके और रहने भी नहीं थे, आपसे शिकवा भी आख़िर क्यों रहेगा, जो हमारे ग़म थे कहने भी नहीं थे आपके अपने मसाइल थे सो होंगे, मेरे दिल में आप ठहरे भी नहीं थे। इक असासा था हमारी ज़िन्दगी में, और उसपे ख़ास पहरे भी नहीं थे।। आपको हमसे रक़ाबत किसलिए है हम कोई नहले पे दहले भी नहीं थे।। उर्मिला माधव

घबरा गए

एक ज़रा सी ...चोट से घबरा गए? हमको देखो हम कहाँ तक आगए , चांदनी हर बाम पै छिटकी रही, हम ही कसदन तीरगी में आगये, जुम्मा-जुम्मा आठ दिन के हो मियाँ, पथ्थरों से किसलिए टकरा गए !!!! देख लो मुड़ने से पहले चार सू, फिर नहीं कहना के तुम चकरा गए, दौड़ते रहते हो बस दीवाना वार वो झटक के ज़ुल्फ़ क्या बिखरा गए उर्मिला माधव

मेरे होने से मच गई हलचल..

मेरे होने से मच गई हलचल, जब मेरी आंख हो गई जलथल, ज़ेह्न बस लौटने को कहता था, एक ख़्वाहिश थी रुक गई उस पल, मैं अकेली ऑ भीड़ ज़्यादा थी, दिल में हर चंद हो गई खलबल, इम्तेहां सब्र का हुआ ज़ाहिर, राह ख़ुद चलके आ गई,बढ़चल, उर्मिला माधव.

ख़ास इक तस्वीर है

जो तुम्हारी ख़ास एक तस्वीर है, वो मेरे दिल की अजब ज़ंजीर है, jo tumhari khaas ek tasviir hai, wo mere dil kiajab zanjeer hai, वो मुझे अपनी सी लगती है सुनो, उसकी सीरत इन्तेहाई शीर है, wo mujhe apnii sii lagti hai suno, uski siirat intehaaii sheer hai, बिन तुम्हारे दिल बहुत बेचैन था, ये महज़ बिछड़े दिनों की पीर है, bin tumhare dil bahut bechain tha, ye mahaz bichhde dinon kii peer hai, रात दिन बाबत तुम्हारे सोचना, क्यूँ मेरे दिल पै रखी शमशीर है, raat-din baabat tumhare sochna, kyun mere dil pe rakhi shamsheer hai, लौट कर आना तो उनको है नहीं, तयशुदा है बस यही तक़दीर है,... laut kar aanaa to unko hai nahin, Tayshuda hai bs yahi taqdeer hai.. #उर्मिलामाधव... 18.11.2015
मैंने ख़ाबों की बहुत ख़ूब अदा देखी है अपनी आंखों की बहुत ख़ूब सज़ा देखी है

ye nagmon kii sureelee

ये नगमों की सुरीली कोई आहट दूर से आती हुई सी,है फ़ज़ाओं में विरह के रंग हैं जोगन कोई गाती हुई सी,है कसक उठती है उसकी आह में डूबी हुई आवाज सुनते ही, कंपा जाती है वो आवाज़ दिल के तार बिखराती हुई सी है, अभी तो रात का पहला पहर है देखना होगा ये आइंदह, कोई झनकार ही पैदा करे आवाज़ मदमाती हुई सी है उर्मिला माधव 12.11.2018

न ये बाक़ी न वो बाक़ी

न ये बाक़ी, न वो बाक़ी, कोई जल्वा नहीं बाक़ी, वो हमको याद आते हैं के जो ज़िंदा नहीं बाक़ी.. ज़मीं पे पांव रखने का, किसीको होश तब आया, के जब दुनिया-ए-फ़ानी में कोई रुतबा नहीं बाक़ी.. ख़ुदी महफूज़ रखने को सिपहसालार क्या रखना, उठा ले हाथ दुनियां से तो कुछ किस्सा नहीं बाक़ी.. ग़रज़ क्या आख़री हिचकी पे वो रोया, नहीं रोया, किसी की बेरुख़ी से जब कोई शिकवा नहीं बाक़ी.. उर्मिला माधव,

संभलना सीख गए

रोते रोते संभलना सीख गए, अपने पैरों पे चलना सीख गए, हम तो पर्दे के पीछे रहते थे, घर से बाहर निकलना सीख गए, अब तो सूरज की तरहा चलते हैं, शाम होते ही ढलना सीख गए, शिकवा ग़ैरों से क्यों करें आख़िर, अपनी राहें बदलना सीख गए, अब पहाड़ों की बर्फ़ जैसे हम, धीरे धीरे पिघलना सीख गए, उर्मिला माधव 9.11.2017

khoob hai

एक शेर ग़ज़ल से.. और कितना आज़माना,जो हुआ वो ख़ूब है, तुम वही हो,हम वही,राज़-ए-निहां कोई नहीं उर्मिला माधव

na ye baqi

न ये बाक़ी, न वो बाक़ी, कोई जल्वा नहीं बाक़ी, वो हमको याद आते हैं के जो ज़िंदा नहीं बाक़ी, ज़मीं पे पांव रखने का, किसीको होश तब आया, के जब दुनिया-ए-फ़ानी में कोई रुतबा नहीं बाक़ी, ख़ुदी महफूज़ रखने को सिपहसालार क्या रखना, उठा ले हाथ दुनियां से तो कुछ किस्सा नहीं बाक़ी, ग़रज़ क्या आख़री हिचकी पे वो रोया, नहीं रोया, किसी की बेरुख़ी से जब कोई शिकवा नहीं बाक़ी.. उर्मिला माधव, 8.11.2018

नहीं डरते

हम तिरे हिज्र से नहीं डरते, यूँ भी डरते तो क्या नहीं मरते? तुझ पे आहों का ही हवाला है, हमतो इक ज़िक्र भी नहीं करते, दिल कभी टूट कर नहीं रोया वरना क्या आह भी नहीं भरते? उर्मिला माधव

ye hamari zindgaani or hum

ये हमारी ज़िन्दगानी और हम, उम्र भर ही नातवानी और हम, हम अकेले और इतने !! हादिसे, रोज़ इक बनती कहानी और हम, वक़्त लाया बाम पर हम आगये, उफ़ हमारी बे-ज़बानी और हम, बे-अदब जुमले निशाने साध कर, शोहदों की लनतरानी....और हम,   ये अजब से हादसे हर ग़ाम पर, आँख जैसे पानी-पानी और हम, उर्मिला माधव... 2.11 .2016

lajjit hun main

लज्जित हूँ मैं , मैं लज्जित हूँ, तुम्हारे दर्प से, खिल्ली उड़ाती हुई, भंगिमाओं से, भावनाओं पर, ठेस पहुंचाते हुए  हठ से, मैं लज्जित हूँ, तुमको समझते हुए भी, ना समझ कर, मैं लज्जित हूँ, आह भरती हुई,वाह पर, मैं लज्जित हूँ, तुम्हें,भीड़ के साथ , खड़ा देख कर, हां मैं लज्जित हूँ, तुम्हारी उन कुंठाओं से, नहीं दिखाई देतीं, जो तुम्हें स्वयम को , मैं पीड़ित हूँ, पथिक---- तुम्हारे भटकाव से, छलनाओं से दिग्भ्रमित, पथिक, मार्ग की बाधाएं,विषम हैं, सीखना होगा, स्वयम के पैरों से चलना, ज़िंदाबाद के नारे, देते हैं बढ़ावा भटकाव को, मैं लज्जित हूँ, तुम्हारे अंधकार की भटकन से, बहुत लज्जित हूँ, तुम्हारे ओढ़े हुए, दर्प से, हां मैं लज्जित हूँ, तुम्हारे,अहंकार से ..… लज्जित हूँ मैं.... उर्मिला माधव, 2.11.2017

kab chal paoge

तुम हमारी मुश्किलों के साथ कब चल पाओगे, साफ़ कहते हैं के आधी राह पर रुक जाओगे, कौन आख़िर चाहता है,उम्र भर जलता रहे, गर तड़पते देख लोगे,तुम बहुत घबराओगे, ज़ख़्म मत छेड़ो गुज़ारिश कर रहे हैं ऐ मियां, ज़िद अगर कर जाओगे तो बाद में पछताओगे, इक ज़माना हो गया,हम इश्क़ लिखते ही नहीं, हम अगर लिख्खेंगे तुम ही दस तरह बल खाओगे हम भी तो हर चंद ख़ुद को रोकते रहते हैं बस, फिर भी ना माने तो ठंडी आग में जल जाओगे, उर्मिला माधव, 2.11.2017

tumhara gam

तुम्हारा ग़म मिरे ग़म से यक़ीनन ही बड़ा होगा, मगर ये भी तो मुमकिन है कोई खुद से लड़ा होगा उर्मिला माधव

dil hai wabastA

हमारी बद्दुआ है दिल तिरा वीरान हो जाए, नमी से हो न वाबस्ता,कि रेगिस्तान हो जाए, 😊😊