नहीं डरते

हम तिरे हिज्र से नहीं डरते,
यूँ भी डरते तो क्या नहीं मरते?

तुझ पे आहों का ही हवाला है,
हमतो इक ज़िक्र भी नहीं करते,

दिल कभी टूट कर नहीं रोया
वरना क्या आह भी नहीं भरते?
उर्मिला माधव



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