ye nagmon kii sureelee

ये नगमों की सुरीली कोई आहट दूर से आती हुई सी,है
फ़ज़ाओं में विरह के रंग हैं जोगन कोई गाती हुई सी,है

कसक उठती है उसकी आह में डूबी हुई आवाज सुनते ही,
कंपा जाती है वो आवाज़ दिल के तार बिखराती हुई सी है,

अभी तो रात का पहला पहर है देखना होगा ये आइंदह,
कोई झनकार ही पैदा करे आवाज़ मदमाती
हुई सी है
उर्मिला माधव
12.11.2018

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge