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Showing posts from April, 2022

रूठ जाते हैं

ऐसा करते हैं,रूठ जाते हैं, ज़िन्दगी भर को छूट जाते हैं... कब तलक आपको पुकारें हम, इतना थकते हैं टूट जाते हैं.. दिल को थामे हैं दोनों हाथों से, आबले फिर भी फूट जाते हैं.. दिल पे पहले ही से ग़रीबी है, लोग ..रह रह के लूट जाते हैं, दिल ने हमको रुलाके तोड़ा है, इसको हाथों से कूट जाते हैं, उर्मिला माधव... 30.4.2017

ख़ुश्क आंखों में जब नमी न रही

ख़ुश्क आंखों में जब नमी न रही, ज़िन्दगी फ़िर ये ज़िन्दगी न रही, जब बड़े हादसों की ज़द में रहे, ज़ब्त की फ़िर कहीं कमी न रही, हमको तनहाई ने संभाला बहुत, तीरगी तुझ से बरहमी न रही, खिड़कियां धुल गईं जो बारिश में, गर्द  फ़िर देर तक जमी न रही... उर्मिला माधव, 30.4.2018

ख़ाब तो हो

सबसे पहले दिल में कोई ख़ाब तो हो,   उसके भी पाने को दिल बेताब तो हो, अव्वल तो ये दुनियां मुश्किल लगती है, और ज़ुबाँ पर अपनी फिर आदाब तो हो, पिछली बातें इतनी चुभती रहती हैं, उनको गारत करने को सैलाब तो हो, देखके जिसको सर सजदे में झुक जाए, इस दुनियां में ऐसा कुछ नायाब तो हो, चाल ख़ता हो जाए, फिर हम उठ जाएं, जिस्म हमारा इतना सेहत् याब तो हो.. उर्मिला माधव

प्यार न करना पछताओगे

प्यार न करना पछताओगे, क़दम-क़दम पे घबराओगे, ये क्यूँ पहना, वो मत पहनो, सुनते-सुनते थक जाओगे, उसको घूर के देख रहे थे ? लगता था के मर जाओगे!! मैं तो जैसे बे मतलब हूँ, जाओ, उसीके घर जाओगे ? मेरे आगे झूठा ड्रामा ?? बात-बात पे डर जाओगे, सच्चाई तो मुझे पता है, झूठी कसमें कब खाओगे ? अपनी ग़लती, छुप जाए सो, बात-बात पर चिल्लाओगे, क्या-क्या समझ में आया भैया? प्यार अभी भी फ़रमाओगे ? उर्मिला माधव, 7.9.2018

हम बहुत आसान थे

देख लीजै हम बहुत आसान थे आप ही तो बस हमारी जान थे। आप के बदले इरादे देख कर, हक़बकाए से बहुत हलकान थे। बात का आख़िर हुआ लब ए लवाब, बे-सबब समझे के हम नादान थे। हम भी अपनी ज़ात के यक़ता हैं बस, ख़ास कुछ तेवर हमारी शान थे। जिन हदों तक हम पहुंच सकते थे तब, उन हदों से आप भी अनजान थे।। उर्मिला माधव 4.8.2019

याद आई है

जब मुझे तेरी याद आई है, मैंने ग़म से निजात पाई है, मेरी आँखों में कितने छाले हैं, इक यही बात बस छुपाई है, मेरी आहों में तू ही तू है पर, अपनी दुनिया कहाँ दिखाई है, लोग पागल करार  करते हैं, मेरी जो तुझसे आशनाई है, इतना आसां नहीं है, ख़ुद होना, ज़िन्दगी भर की ये कमाई है, हंसने वालों में तू नहीं शामिल, लौट अइयो, तुझे दुहाई है, उर्मिला माधव 5.6.2019

सबसे अव्वल बात

सबसे अव्वल बात तो नज़दीक आना चाहते हैं, और फिर नज़दीक आकर,दिल दुखाना चाहते हैं एक मुद्दत से मुझे तन्हाई घेरे फिर रही  उसपे ये मुश्किल वो मुझसे एक ज़माना चाहते हैं, मैं हूँ और इस ज़िन्दगी के कितने सारे मसअले, क्या ख़बर के लोग क्या झगड़े चुकाना चाहते हैं, उर्मिला माधव 29.2.2016

झूटा हँसाना चाहता था

वो मुझे झूठा हँसाना चाहता था, मैंने समझा ग़म मिटाना चाहता था, Wo mujhe jhutha hansanaa chahta tha, Maine samjha gham mitana chahta tha, अश्क़ तो पोंछे न अपनी उँगलियों से हाँ मगर उंगली उठाना चाहता था, Ashq to pichhe n apni ungliyon se, Haan magar ungli uthana chahta tha, तंग दिल ख़ुद दे न पाया प्यार भी, मुझसे जो पूरा ज़माना चाहता था, Tang dil khud de n paya pyar bhi, Mujhse jo puraa zamana chahta tha, क्या लिखूं अल्फ़ाज़ मैं उसके तईं, कौनसी दुनियां दिखाना चाहता था, Kya likhun alfaz main uske taiin, Kaunsi duniyan dikhana chahta tha, गाहे-गाहे अपनी खुशियों के लिए, ज़िन्दगी में आना-जाना चाहता था.. Gaahe-gaahe apni khushiyon ke liye, Zindagi men aana-jana chahta tha.. उर्मिला माधव.. 22.11.2016

हमने बचाई लाख मगर

हमने बचाई लाख मगर बात चल गई, उनकी गली मुड़ी तो वहीँ शाम ढल गई, भारी पड़ी सभी को महज़ सादगी हुज़ूर, दुनियां मुहब्बतों के सभी ख़म निगल गई, कबसे वो कह रहे थे हमें,है खुश आमदीद, आया जो वक़्त-ए-वस्ल तो दुनियां बदल गई.... उर्मिला माधव

होश क्यों नहीं क़ायम

दो शेर, अपने बहुत प्यारे दोस्त के लिए... ये तड़प तुझको मार डालेगी ये तिरा होश क्यों नहीं क़ायम, तू तो शायर है, बात कहता रह, फिर ये दुनिया भी आ ही जानी है उर्मिला माधव

सर पे गाज़ है

दम-ब दम ये सच है सर पै ग़ाज़ है, फिर भी दिल को बेख़ुदी पर नाज़ है, जा-ब-जा दर-दर भटक कर क्या करूँ, यूँ तो ख़ामोशी भी इक आवाज़ है, हैं निशाँ अश्कों के आरिज़ पर मिरे, इनमें कुछ गुस्ताख़ियों का राज़ है, तोड़ कर जो मुझको तोहफ़े में दिया, अब तलक हाथों में वो ही साज़ है, ग़म,तबस्सुम हैं मुकम्मल साथ में,   ज़िन्दगी का बस यही अंदाज़ है..... --------------------------------------------- dam-b-dam ye sach hai sir pe ghaaz hai, phir bhii dil ko be-khudii pe naaz hai, jaa-b-jaa dar-dar bhatak kar kya karun, yun to khaamoshii bhii ik aawaaz hai, hain nishaan ashkon ke aariz par mire, inmain kuchh gustaakhiyon kaa raaz hai, tod kar jo mujhko tohfe main diyaa, ab talak haathon main wo hii saaz hai, gham,tabassum hain mukammal saath main, zindagii kaa bas yahii andaaz hai...... उर्मिला माधव...

रंजो ग़म हमारा है

ख़ताएँ आपकी हैं रंज ओ ग़म हमारा है, समझ सकें तो यही ख़ास इक इशारा है. हमें है ख़ब्त यूं ही ग़मज़दा ही रहने का, तुम्हीं बताओ तुम्हें हमने कब पुकारा है? किसी भी वक़्त तुम्हें वक़्त ही नहीं रहता, तुम्हें समझ ही नहीं इसमें जो ख़सारा है.. हमारे पास है परचम फ़क़त बुलंदी का, हमारी उम्र तो ख़ल्वत का इक इदारा है.. हमारी आंख में ठहरा हुआ है इक सागर, मज़ा तो ये है यही ज़ीस्त का सहारा है.. उर्मिला माधव

तेरी याद आई है

जब मुझे तेरी याद आई है, मैंने ग़म से निजात पाई है, मेरी आँखों में कितने छाले हैं, इक यही बात बस छुपाई है, मेरी आहों में तू ही तू है पर, अपनी दुनिया कहाँ दिखाई है, लोग पागल करार  करते हैं, मेरी जो तुझसे आशनाई है, इतना आसां नहीं है, ख़ुद होना, ज़िन्दगी भर की ये कमाई है, हंसने वालों में तू नहीं शामिल, लौट अइयो, तुझे दुहाई है, उर्मिला माधव 5.6.2019

तो समझ तो मुझको ज़रा-ज़रा

तू जो दोस्त ही है अगर मेरा, तो समझ तो मुझको ज़रा ज़रा, वो जो ज़ख़्म मेरा भरा नहीं, किया फिर से तूने हरा हरा, मेरा ग़म से सीना फ़िग़ार है रहे दिल भी सबसे डरा डरा, इसे तू ही कह क्या ये ठीक है? हुआ सौदा तुझसे खरा खरा, लगे चश्मे ख़ुश्क तो ख़ुश्क ही, है ये दिल तो अब भी भरा भरा..... --------------------------------------------- Tu jo dost hii hai agar mera. To samajh to mujhko zaraa zaraa, Wo jo zakhm mera bharaa nahin, Kiya phir se tune haraa haraa... Mera gam se seena figaar hai Rahe dil.bhi.sabse daraa daraa, Ise tu hii kah kya ye.thik hai Hua saudaa tujhse kharaa kharaa, Haan ye chashme khushq hai khushq hii, Hai ye dil.to ab bhii bharaam bharaa... Urmila Madhav.. ... 21.4.2015

रात नहीं है

शहनाइयों की गूंज या महफ़िल हो रंग पे, तारों की रौशनी से सजी रात नहीं है

मोतबर नहीं होता

कोई भी मोतबर नहीं होता, हो भी तो उम्र भर नहीं होता, तेरी फ़ितरत अगर सही होती, राबिता दर ब दर नहीं होता, इक मरासिम था सो भी टूट गया, जो कभी मुख़्तसर नहीं होता, बस मिरा फ़ैसला भी सुन लीजै, अब यहां कुछ असर नहीं होता, उर्मिला माधव बाब-दरवाज़ा इंतिख़ाब--सिलेक्शन

साए कितना बदल गया है तू

साए कितना बदल गया है तू, वक़्त के साथ ढल गया है तू, क्यूं फ़क़त रौशनी का साथी है, तीरगी से निकल गया है तू, मैंने जब पीछे मुड़ के देखा है, सह्न-ए-सूरज में जल गया है तू, उर्मिला माधव 15.4.2019

असबाब हैं

सब नुमाइश में रखे असबाब हैं, गोकि बिकके भी बहुत शादाब हैं, हमने अब पर्दे लगाए ज़ीस्त पर, देख लीजै हम कहाँ बे ताब हैं, या गुज़िश्ता वक़्त हो के आज अब, हम अज़ल से ही बहुत नायाब हैं, उर्मिला माधव

दुश्वार रहगुज़र में

दुश्वार रहगुज़र में हुआ राहबर, ख़ुदा, जब जिस्म से थके तो हुआ डाक्टर, ख़ुदा, तन्हाई में तड़पते हुए रो रहे थे जब, मिलने की जुस्तजू में हुआ कारगर ख़ुदा उर्मिला माधव

आजकल वो हो गए हैं संगदिल

आज कल वो होगए हैं संग दिल, आदतन यूँ भी हैं वो कुछ तंग दिल, हम रक़ाबी में सजा कर ले गए , कितना सुंदर ख़ुशनुमाँ नौरंग दिल, इससे बढ़ कर बेरुख़ी होती भी क्या बा-अदब लौटा दिया बैरंग दिल उर्मिला माधव.. 13.4.2014...

बात ऐसी मैं तुम्हें बतला रही हूँ

बात ऐसी मैं तुम्हें बतला रही हूँ, ख़ास मंज़िल से उतर कर आ रही हूँ, कुछ धुएं थे और थे बादल बहुत से, आमिरों की शक्ल में पागल बहुत से, कुछ असीरी में बंधे थे ख़ुद ब खुद ही, पाँव भी ज़ंजीर थे सो ख़ुद ब ख़ुद ही, जाने कितने मसअलों पर तज़किरे थे, मेरी नज़रों में तो सब ही सरफिरे थे, सबके चेहरों पर अजब सी वहशतें थीं, बिन बुलाई मौत की सी दह शतें थीं, झूठ किस्से फ़स्ल की बर्बादियों के, बाँट हिस्से अपनी कुछ आबादियों के, मैं नहीं समझी ये कैसे लोग हैं सब!! हंस रहे पर लग रहे पुर सोग हैं सब, पाँव हैं पर चल रहे बैशाखियों पर, और क़दम रख्खे हैं केवल हाशियों पर, #उर्मिलामाधव... 13.4.2015.... क्रमशः ....

चिलचिलाती धूप

सामने ये चिलचिलाती धूप है,? या तुम्हारा छद्म वेशी रूप है ? बस इसी जंगल में तुमको देखती हूँ, ख़ुश्क पत्तों को सदायें भेजती हूँ, जब हवा बनकर गुज़रते हो यहाँ से, धीमी सी आवाज़ आती है वहां से, सब के सब इसको बगीचा कह रहे हैं, सबने मिलके इसको सींचा कह रहे हैं, वो जो एक झीना सा पर्दा बीच में है, बस के एक परदेस इसकी सीध में है, धूप में कुर्सी पै सर को टेकती हूँ, और उसी परदे से तुमको देखती हूँ, इसलिए इस धूप से नाता रहा है, तुमको सूरज छू के जो आता रहा है, गर्मियों में ये झुलस कर डर गए हैं, शाख़ और पत्तों के रिश्ते मर गए हैं, मैं मगर तुमसे जुड़ी हूँ उम्र भर को, ढूँढती रहती हूँ,ख़ुद अपनी नज़र को.... :::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::: Saamne ye chilchilaati dhoop hai, Ya tumhara chhadm veshi roop hai , bas isi jungle men tumko dekhti hun, khushq patton ko sadaayen bhejti hun, Jab hawa ban kar guzarte ho yahan se, Dhimi sii aawaz aati hai wahan se, Log to isko bagicha kah rahe hain, Sabne milke isko siincha kah rahe hain, Wo jo ek jheena sa parda beech men hai, Bas ke ek pardes iski seedha ...

ताब रखते हैं

हम तख़य्युल की ताब रखते हैं, अपने दिल में ही ख़ाब रखते हैं, ज़ख्म-ए-उल्फ़त के सब सवालों का, हर मुकम्मल जवाब रखते हैं, दिल कभी टूट कर न रोये कहीं, क़तरा-क़तरा हिसाब रखते हैं.. मुसकराते हैं ज़ेरे लब हर दम, दिल में लाखों अज़ाब रखते हैं, ज़िन्दगी चूँकि तुझको जीना है, खुद ही खाना ख़राब रखते हैं, मौत दावा करेगी क्या हम पर, जिसको हम इन्तिख़ाब रखते हैं, उर्मिला माधव 10.4.2018
ज़िन्दगी मुझको हराने पर तुली है, वक़्त की आंधी घर आने पर तुली है