हमने बचाई लाख मगर

हमने बचाई लाख मगर बात चल गई,
उनकी गली मुड़ी तो वहीँ शाम ढल गई,

भारी पड़ी सभी को महज़ सादगी हुज़ूर,
दुनियां मुहब्बतों के सभी ख़म निगल गई,

कबसे वो कह रहे थे हमें,है खुश आमदीद,
आया जो वक़्त-ए-वस्ल तो दुनियां बदल गई....
उर्मिला माधव

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