मोतबर नहीं होता

कोई भी मोतबर नहीं होता,
हो भी तो उम्र भर नहीं होता,

तेरी फ़ितरत अगर सही होती,
राबिता दर ब दर नहीं होता,

इक मरासिम था सो भी टूट गया,
जो कभी मुख़्तसर नहीं होता,

बस मिरा फ़ैसला भी सुन लीजै,
अब यहां कुछ असर नहीं होता,
उर्मिला माधव
बाब-दरवाज़ा
इंतिख़ाब--सिलेक्शन

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