याद आई है

जब मुझे तेरी याद आई है,
मैंने ग़म से निजात पाई है,

मेरी आँखों में कितने छाले हैं,
इक यही बात बस छुपाई है,

मेरी आहों में तू ही तू है पर,
अपनी दुनिया कहाँ दिखाई है,

लोग पागल करार  करते हैं,
मेरी जो तुझसे आशनाई है,

इतना आसां नहीं है, ख़ुद होना,
ज़िन्दगी भर की ये कमाई है,

हंसने वालों में तू नहीं शामिल,
लौट अइयो, तुझे दुहाई है,
उर्मिला माधव
5.6.2019

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