ये दिल ढूँढता है जगहा अजनबी सी, हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी, कभी ज़िंदगी में ये दिन भी दिखाना, के हर सम्त इक अजनबी रंग लाना, ज़मीं अजनबी,आसमां अजनबी हो, कोई शख्स हो रु-ब-रु,अजनबी हो, लगे जिसकी हर इक अदा अजनबी सी, हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी..... हथेली पे कुछ नाम हों अजनबी से, पढ़े ही न जाएँ,पढ़ें हम कहीं से, मिले जो बशर वो बशर,अजनबी हो, सुनो मुख़्तसर,कुल दह्र अजनबी हो, मिले दर्द-ए-दिल को दवा अजनबी सी, हवा अजनबी सी, फ़ज़ा अजनबी सी... उर्मिला माधव ... 4.3.2016...