बुरा लगता है
दम-ब दम ये सच है सर पै ग़ाज़ है,
फिर भी दिल को बेख़ुदी पर नाज़ है,
जा-ब-जा दर-दर भटक कर क्या करूँ,
यूँ तो ख़ामोशी भी इक आवाज़ है,
हैं निशाँ अश्कों के आरिज़ पर मिरे,
इनमें कुछ गुस्ताख़ियों का राज़ है,
तोड़ कर जो मुझको तोहफ़े में दिया,
अब तलक हाथों में वो ही साज़ है,
ग़म,तबस्सुम हैं मुकम्मल साथ में,
ज़िन्दगी का बस यही अंदाज़ है.....
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