ख़ूब है
मंसूब है
मेरी अपनी ज़िन्दग़ी मेरी नज़र में ख़ूब है,
इसलिए हर रंग मेरा ..मुझसे ही मंसूब है,
आँख में काजल नहीं ऑ मांग में सुर्ख़ी नहीं,
पर मुहब्बत का मुझे मालूम हर उस्लूब है ,
ये हकीक़त है के उसने आज पर्दा कर लिया,
फिर भी मेरी ज़िन्दगी में एक वही महबूब है,
जाने कितनी बाज़ियां जीती हैं मैंने उम्र भर
तुमने कैसे कह दिया के दिल मेरा मग्लूब है
मैं नमाज़ी हूँ मुझे हासिल हैं रब की नेमतें,
लोग कहते हैं मिरा अंदाज़ ही मज्जूब है,
उर्मिला माधव....
5 .8 .2017 ..
उस्लूब--- रीति
मग्लूब---पराजित
मज्जूब--- वो संत जो देखने वालों के लिए बावला हो
Comments
Post a Comment