एक पैरोडी

एक पैरोडी शायर से माजरत के साथ🙏😊
ख़मोश लब हैं खुली हैं पलकें अभी ये नफ़रत नई–नई है,
अभी तक़ल्लुफ़ है दुश्मनी में, अभी अदावत नई–नई है..
जो खानदानी लफंगे हैं वो मिज़ाज रखते हैं गर्म अपना,
तुम्हारा लहजा बता रहा है अभी बग़ावत नई–नई है 
🙏🙏

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