दिन में शमा जलाके रखी

दिन में शमां जला के रखी, शाम के लिए,
क्या ख़ैरियत हवा भी चली नाम के लिए,

महफ़िल के रंग उड़ने लगे, आपके बग़ैर,
दिन हो गया तो जाने लगे, काम के लिए,

दिल का मुआमला था कई बोलियां उठीं,
किसको थी फ़िक़्र पूछे कोई दाम के लिए,

सूरज तेरी तपिश में रहे, उम्र भर को हम,
भारी पड़ा क़दम जो उठा बाम के लिए,

उसकी नज़र से पी जो कभी आख़री शराब,
बस हाथ फ़िर उठे ही नहीं, जाम के लिए,
उर्मिला माधव..
9.9.2918

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