बुलाया करते हैं
हम अपने आप को हरदम जलाया करते हैं,
सो आग वालों को रस्मन बुलाया करते हैं,
अभी तो जिस्म से कितना हिसाब बाक़ी है,
तो इसमें ज़ख़्म का गुलशन खिलाया करते हैं,
अगरचे फूल भी मिलते हैं घिर के ख़ारों से,
हम ऐसे शख़्स तो शबनम चुराया करते हैं,
समझ में आ गया हम को के दुनिया फ़ानी है,
सो नस्ले नौ को भी मदफ़न दिखाया करते हैं,
उर्मिला माधव
9.9.2019
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