हे सदाशिव
हे सदाशिव आपका आभार है,
शून्य ही तो सृष्टि का आधार है.
कितनी सारी शक्तियां ब्रह्माण्ड की,
कुछ निरापद है तो ये संसार है,
ह्रास चारित्रिक हुआ मानव का अब,
हर किसी मस्तिष्क में व्यभिचार है,
जो करोगे,लौट कर मिल जाएगा,
अवतरित है और ये साकार है,
दिग्भ्रमित होना तो निश्चित है यहाँ,
इस तरह संसार का आकार है....
उर्मिला माधव...
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