ग़ज़ल की प्रचलित बहरें
ग़ज़ल की प्रचलित बहरें 1. बहरे कामिल मुसम्मन सालिम मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन मुतफ़ाइलुन 11212 11212 11212 11212 ये चमन ही अपना वुजूद है इसे छोड़ने की भी सोच मत नहीं तो बताएँगे कल को क्या यहाँ गुल न थे कि महक न थी ——————————————– 2. बहरे खफ़ीफ मुसद्दस मख़बून फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन 2122 1212 22 प्या ‘स’ को प्या ‘र’ करना था केवल एक अक्षर बदल न पाये हम ——————————————– 3. बहरे मज़ारिअ मुसम्मन मक्फ़ूफ़ मक्फ़ूफ़ मुख़न्नक मक़्सूर मफ़ऊल फ़ाइलातुन मफ़ऊल फ़ाइलातुन 221 2122 221 2122 जब जामवन्त गरजा, हनुमत में जोश जागा हमको जगाने वाला, लोरी सुना रहा है ——————————————– 4. बहरे मुजतस मुसमन मख़बून महज़ूफ मुफ़ाइलुन फ़यलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन 1212 1122 1212 22 भुला दिया है जो तूने तो कुछ मलाल नहीं कई दिनों से मुझे भी तेरा ख़याल नहीं ——————————————– 5. बहरे मज़ारिअ मुसमन अख़रब मकफूफ़ मकफूफ़ महज़ूफ़ मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईलु फ़ाइलुन 221 2121 1221 212 क़िस्मत को ये मिला तो मशक़्क़त को वो मिला इस को मिला ख़ज़ाना उसे चाभियाँ मिलीं ——————————————– 6...