नौरंग दिल

आज कल वो होगए हैं संग दिल,
आदतन यूँ भी हैं वो कुछ तंग दिल,

पश्त में इसको सजा कर ले गए ,
कितना सुंदर ख़ुशनुमाँ नौरंग दिल,

इससे बढ़ कर बेरुख़ी होती भी क्या
बा-अदब लौटा दिया बैरंग दिल,

लौट कर उस दर पै अब क्यूँ जायेंगे,
खुद ही खुद से कर रहा है जंग दिल,

होगया आलूदा दस्त-ए-दह्र से
क्या दिखाएँ उनको ये बदरंग दिल....
#उर्मिलामाधव...
4.5.2015

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