अगर ये वक़्त कभी
एक मतला दो शेर-----
अगर ये वक़्त कभी हम से डर गया होता,
ये समझो ज़ोर-ओ-ज़बर ग़म भी मर गया होता,
सदा-ए-रंज-ओ अलम, हमसे डर गई होती,
बहार-ओ-गुल का चमन रक्स कर गया होता,
अगर वफ़ा की नज़र,हमसे मिल गई होती,
पुराना ज़ख्म-ए-जिगर कबका भर गया होता,
#उर्मिलामाधव ...
9.3.2015...
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