कोई क्या करे
पुराने पन्नों से--- ========== दिलजले महबूब की बांहों का कोई क्या करे?? खार से लिपटी हुयी राहों का कोई क्या करे?? एक हसरत के लिए..दुनिया नज़र अंदाज़ हो, इस क़दर बहकी हुयी चाहों का कोई क्या करे?? ग़र्क़ हो ऐसी मुहब्बत,जो ख़ुशी को छीन ले बर्फ होती,सर्द सी....आहों का कोई क्या करे, जो वफ़ा के नाम पर.....सूली चढा दे दार पर, उस अहद के बदगुमां,शाहों का कोई क्या करे?? कर दिए ज़ंजीर जिसने....ज़िन्दगी के रास्ते, फिर भला ऐसी सिपह्गाहों का कोई क्या करे?? उर्मिला माधव... 18.10.2013..