इक नंबर रहे

हम हमेशा वक़्त की सरहद पर इक नंबर रहे,
दिल डरा करता था लेकिन हम वहीं जाकर रहे.

इतनी सारी सरहदें दीवार बन कर साथ थीं
क्या बताएं किस लिए हम उम्र भर बे घर रहे.

बज़्म की रंगीनियां भी रु ब रु होती रहीं,
हम मगर दानिशवरों की भीड़ में हटकर रहे.
उर्मिला माधव

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