intro
--------1---------- हे सदाशिव आपका आभार है, शून्य ही तो सृष्टि का आधार है. कितनी सारी शक्तियां ब्रह्माण्ड की, कुछ निरापद है तो ये संसार है, ह्रास चारित्रिक हुआ मानव का अब, हर किसी मस्तिष्क में व्यभिचार है, जो करोगे,लौट कर मिल जाएगा, अवतरित है और ये साकार है, दिग्भ्रमित होना तो निश्चित है यहाँ, इस तरह संसार का आकार है.... #उर्मिलामाधव... 15.7.2015... ----------------------------------------- -------------------2--------------------- अपनी ख़ुद्दारी के दम पर जी रहे हैं, इस लिए हम ज़ह्र लाखों पी रहे हैं, बारहा होते मुख़ातिब ज़ख्म अक्सर, हम मुसलसल साथ इसके ही रहे हैं. ये अनादारी है आदत के मुताबिक, हम न ज़ाती रंग में तरही रहे हैं, आपसी रिश्ते निभाने के चलन में, यूँ समझ लो एकदम सतही रहे हैं, जब जहाँ धोखा धड़ी का दौर आया, इक निशाने इसके बस हम ही रहे हैं.... #उर्मिलामाधव ... 9.7.2015... ------------------------------------------ -------------------३---------------------- पुराने पन्नों से----- लफ़्ज़ लिखे और टांग दिए दीवारों में, अपनी गिनती रखी नहीं फनकारों में, ख़ुद पढ़ते हैं ख़ुद ही खुश हो जाते हैं, नाम ...