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Showing posts from June, 2020

intro

--------1---------- हे सदाशिव आपका आभार है, शून्य ही तो सृष्टि का आधार है. कितनी सारी शक्तियां ब्रह्माण्ड की, कुछ निरापद है तो ये संसार है, ह्रास चारित्रिक हुआ मानव का अब, हर किसी मस्तिष्क में व्यभिचार है, जो करोगे,लौट कर मिल जाएगा, अवतरित है और ये साकार है, दिग्भ्रमित होना तो निश्चित है यहाँ, इस तरह संसार का आकार है.... #उर्मिलामाधव... 15.7.2015... ----------------------------------------- -------------------2--------------------- अपनी ख़ुद्दारी के दम पर जी रहे हैं, इस लिए हम ज़ह्र लाखों पी रहे हैं, बारहा होते मुख़ातिब ज़ख्म अक्सर, हम मुसलसल साथ इसके ही रहे हैं. ये अनादारी है आदत के मुताबिक, हम न ज़ाती रंग में तरही रहे हैं, आपसी रिश्ते निभाने के चलन में, यूँ समझ लो एकदम सतही रहे हैं, जब जहाँ धोखा धड़ी का दौर आया, इक निशाने इसके बस हम ही रहे हैं.... #उर्मिलामाधव ... 9.7.2015... ------------------------------------------ -------------------३---------------------- पुराने पन्नों से----- लफ़्ज़ लिखे और टांग दिए दीवारों में, अपनी गिनती रखी नहीं फनकारों में, ख़ुद पढ़ते हैं ख़ुद ही खुश हो जाते हैं, नाम ...

होने दिया

Dil ko hifze aabruu awwal lagii, Uske evaz jo huaa hone diyaa.... ------------------------------------------------ दिल को हिफ्ज़े आबरू अव्वल लगी, बाद उसके . जो हुआ होने दिया... बस, के दो राहें  ..नहीं मंज़ूर थीं, मील के पत्थर को सर होने दिया... अपने घर की सीढियां अच्छी लगीं, और वहीँ तक हर सफ़र होने दिया... उर्मिला माधव 29.6.2015

तस्वीरें

तस्वीरों की हैसियत ? कम नहीं होती, जानते हो ? ये इतिहास रखती हैं अपने अन्दर, तो चलो इतना बताओ, कैसे ये साबित करोगे? तुम कभी दो साल के थे, किस तरह दिखते थे तुम, आज कंप्यूटर की दुनियां की अजब ही दास्ताँ है, ये बता देगा,दिखा देगा , तुम्हें इतिहास कितने, ये महज़ तस्वीर का है खेल सारा, तस्वीरें, चेहरों की,लफ़्ज़ों की,और इतिहासों के पन्ने, तुम कभी पहले भी थे न ? और देखो आज भी हो, क्या खबर मैं न होऊं, क्या खबर तुम न होओ, मेरे होने की गवाही उस समय तस्वीर देगी,  नित नई तस्वीर तुम भी खींचना अब सीख लो, और जमा करते चलो , भरपूर यादें, क्या-क्या रंगत थी हमारी ज़िन्दगी की, मेरे प्रोफाइल से सब देखा करेंगे, इसलिए मैं रोज़ तस्वीरें बदल कर, अपनी रंगत अपने मन से देखती हूँ.... ये अभी मेरे लिए हैं, बाद में होंगी धरोहर, मैं नहीं आऊंगी इनको देखने, तुमसे भी मैंने कहा था एक दिन, तुम कोई तस्वीर बदलो , और खुद तनहाई में देखा करो, तुम न माने तुम नहीं माने थे हरगिज़, मैंने अपना मन दुखाया, और तुम्हारे दर से घर को लौट आई, अब नहीं कहती हूँ तुमसे, और कहूँगी भी नहीं.... मेरा क्या है जोर इन पर , मेरी तस्वीरें नहीं ये... #उर...

झींकता क्यूं है

चमन में,फाख्ताएं,बुलबुलें,और खुशबुएँ भी हैं, वो आख़िर चाहता क्या है,हवा में चीख़ता क्यूँ है ?? मुहब्बत के हंसीं जलवे,शह्र के ख़ूब रु मंज़र, उसे सब कुछ मुहैया है,तो इतना झींकता क्यूँ है ?? #उर्मिलामाधव, 22.6.2015

जंग नहीं

बाजियां खेलों की होती हैं,मुहब्बत की नहीं, हारना क्या जीतना क्या,प्यार है कोई जंग नहीं खेलिए और देखिये शतरंज भी क्या खेल है, बादशाहत और वज़ीरी, तीसरा कोई रंग नहीं.. ढाई घर घोड़ा चले और एक घर पैदल चले, हारना है तयशुदा,ग़र .खेल का कोई ढंग नही.. लोग एक प्यादे की दम पै बाजियां जीता किये, ज़िन्दगी देता है,उसका हौसला कोई तंग नहीं #उर्मिलामाधव.. 19.6.2015

खरे हैं

हम जहन्नुम से निकल कर आए हैं,बिलकुल खरे हैं, कुछ तो ऐसे ज़ख़्म हैं जो आज भी अब भी हरे हैं, इस क़दर हमने तपिश ख़ुर्शीद की बरदाश्त की है, ग़ैर मुमकिन है समझना…...जीते जी हैं या मरे हैं... वक़्त के यक़ता मनाज़िर देख कर हमने कहा,  सच बताना आईने क्या हम कभी तुझसे डरे हैं ? दिल खंगाला तो तुम्हे, कुछ वक़्त तो लग जाएगा, फिर भी इतना जान लोगे हम ख़यालों से परे हैं, उर्मिला माधव

खरे हैं

हम जहन्नुम से निकल कर आए हैं,बिलकुल खरे हैं, कुछ तो ऐसे ज़ख़्म हैं जो आज भी अब भी हरे हैं, इस क़दर हमने तपिश ख़ुर्शीद की बरदाश्त की है, ग़ैर मुमकिन है समझना…...जीते जी हैं या मरे हैं... उर्मिला माधव 14.6.2017

शाम तुमको पहुंचे

तन्हाइयों से सजकर हर शाम तुमको पहुँचे, अल्फ़ाज़ आख़री हैं,पैग़ाम तुमको पहुंचे। जितना भी हो सका था,बर्दाश्त के मुताबिक, हम जो भी कर रहे थे,वो काम तुमको पहुंचे। अब कहके क्या करेंगे, क्या-क्या रहा मुक़ाबिल, लबरेज़ उलझनों का,बस जाम तुमको पहुंचे। गर मुस्तकिल है कुछ भी,तो आबला-ए-पा ही एक शक़्ल-ए-बानगी में बस बाम तुमको पहुँचे। किस दर्जा हम लड़े हैं,इक तिश्नगी से अपनी, आवारगी का सारा इलज़ाम तुमको पहुंचे।। उर्मिला माधव... 13.6.2016

कड़ी धूप

मैं कड़ी धूप में निकल जाऊं, अपनी मर्ज़ी से जाके जल जाऊं, जम के पत्थर सी हो गई हूँ ना, दिल ये करता है अब पिघल जाऊं, इस ज़माने से दूर जाने को, हर किसी शख्स से बदल जाऊं, बरसों खामोश रहके देख लिया, अब तो हर मुंह पै मुंह के बल जाऊँ, चलते चलते ही यूँ भी हो जाए, सबके सीने पै खाक़ मल जाऊँ.... #उर्मिलामाधव... 9.6.2015

सहर भी

आई है अगर रात तो होनी है सहर भी, भरपूर उजाला है उधर होगा इधर भी, तकदीर की ये ज़िद है मुझे कुछ नहीं देना, उसपे हूँ मुन्तज़िर, हो ज़रा एक नज़र भी, ज़ानूँ पै रखा सर तो झुका दिल भी यक़ायक़, गुज़रा है बड़ी टीस से ये लख्त-ए-जिगर भी, अंजाम से वाकिफ हूँ मगर रोज़ तकूँ राह, रखता है एतमाद से वो सबकी ख़बर भी, सूंघा है कभी हमने अगर दिल ये मसल के, इसरार जो होता है,तो होता है असर भी..... उर्मिला माधव ... 8.6.2015

झुकती नहीं है

तेरे बिन ज़िन्दगी कुछ भी नहीं है, हां मगर ये ज़िन्दगी रुकती नहीं है, ये तक़ाज़ा है मुहब्बत का हमारी, जब वफ़ा के वास्ते झुकती नहीं है, ग़ैर के आगे कभी झुकती नहीं है, उर्मिला माधव

सखियां कहतीं

सखियाँ कहतीं,साजन के बिन प्यार अधूरा लगता है, अम्मां कहतीं काजल बिन....सिंगार अधूरा लगता है, चाहे जितनी बिजली चमके,घर की सभी मुंडेरों पर, बिन बरखा के बादल का...हर वार अधूरा लगता है, हीरे मोती जड़े रहें और धार भी हो.....तलवारों पर, युद्ध वीर के हाथों बिन.....हथियार अधूरा लगता है, भारी भरकम दरवाजों पर.....सजी हुई मेहराबें हैं, बेटी की बारात बिना......हर द्वार अधूरा लगता है, सदियों से कई  नाम लिखे हैं जगह-जगह दीवारों पर, सत्य सनातन,शिव के बिन विस्तार अधूरा लगता है, उर्मिला माधव...

दिखा दूँ तो

दिल के छाले अगर दिखा दूँ तो, अपनी किस्मत के ख़म गिना दूँ तो, फ़ाख्ता बनके होश उड़ लेंगे, ज़िक्र ग़र रू-ब-रू चला दूँ तो, चश्म-ए-गिरया में डूब जाआगे अपनी दुनियां के ग़म सुना दूँ तो, आबशारों की हद भी कम होगी, अश्क़ अपने अगर बहा दूँ तो, हाथ कालक से काले हो जाएँ, अपने कुछ ख़त जले दिखा दूँ तो... ********************************** dil ke chhaale agar dikhaaduun to, Apni qismat ke kham gina dun to, faakhtaa banke hosh ud lenge, ziqr gar ruu-ba-ruu chalaa duuun to, chashm-e-giriyaan main doob jaaoge apni duniyaan ke gam sunaa duun to, aabshaaron kii had bhii kam hogii, ashq apne agar bahaa duun to, haath kaalak se kaale ho jaayen, apne kuchh khat jale dikhaa duun to, #उर्मिलामाधव ... 1.6.2015