जंग नहीं
बाजियां खेलों की होती हैं,मुहब्बत की नहीं,
हारना क्या जीतना क्या,प्यार है कोई जंग नहीं
खेलिए और देखिये शतरंज भी क्या खेल है,
बादशाहत और वज़ीरी, तीसरा कोई रंग नहीं..
ढाई घर घोड़ा चले और एक घर पैदल चले,
हारना है तयशुदा,ग़र .खेल का कोई ढंग नही..
लोग एक प्यादे की दम पै बाजियां जीता किये,
ज़िन्दगी देता है,उसका हौसला कोई तंग नहीं
#उर्मिलामाधव..
19.6.2015
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