तस्वीरें
तस्वीरों की हैसियत ?
कम नहीं होती,
जानते हो ?
ये इतिहास रखती हैं अपने अन्दर,
तो चलो इतना बताओ,
कैसे ये साबित करोगे?
तुम कभी दो साल के थे,
किस तरह दिखते थे तुम,
आज कंप्यूटर की दुनियां की अजब ही दास्ताँ है,
ये बता देगा,दिखा देगा ,
तुम्हें इतिहास कितने,
ये महज़ तस्वीर का है खेल सारा,
तस्वीरें,
चेहरों की,लफ़्ज़ों की,और इतिहासों के पन्ने,
तुम कभी पहले भी थे न ?
और देखो आज भी हो,
क्या खबर मैं न होऊं,
क्या खबर तुम न होओ,
मेरे होने की गवाही उस समय तस्वीर देगी,
नित नई तस्वीर तुम भी खींचना अब सीख लो,
और जमा करते चलो ,
भरपूर यादें,
क्या-क्या रंगत थी हमारी ज़िन्दगी की,
मेरे प्रोफाइल से सब देखा करेंगे,
इसलिए मैं रोज़ तस्वीरें बदल कर,
अपनी रंगत अपने मन से देखती हूँ....
ये अभी मेरे लिए हैं,
बाद में होंगी धरोहर,
मैं नहीं आऊंगी इनको देखने,
तुमसे भी मैंने कहा था एक दिन,
तुम कोई तस्वीर बदलो ,
और खुद तनहाई में देखा करो,
तुम न माने तुम नहीं माने थे हरगिज़,
मैंने अपना मन दुखाया,
और तुम्हारे दर से घर को लौट आई,
अब नहीं कहती हूँ तुमसे,
और कहूँगी भी नहीं....
मेरा क्या है जोर इन पर ,
मेरी तस्वीरें नहीं ये...
#उर्मिलामाधव ...
27.6.2015...
Comments
Post a Comment