ताक पर

अब यही हालात हैं,तहज़ीब रक्खी ताक पर,
रंग में कालक मिलाई और घुमाया चाक पर 

दिल में लाखों मैल लेकर,दिल मिलाने आगये,
बे-हयाई का चलन है समझें हैं बेबाक पर....

अब वो रंगा-रंग जैसा होलियों का रंग कहाँ,
रंग थे होली के गाढ़े,दिल बहुत शफ्फाक,पर ....

वो सुरीले फाग के रंग वो मुग़न्नी अब कहाँ,
कौन है बाक़ी मुनक़्क़ीद,ख्वाहिशे,मुश्ताक पर,

लोग जो जीते थे,ज़ात-ए-किब्रिया के वास्ते,
जान दे जाते हैं आख़िर अब हुजूम-ए- शाक पर....

अब जुबां का बंद रखना,वक़्त को दरकार है,
तज़किरा करना ही क्या अब,हालत-ए-नापाक पर,

इस तरह दामन बचाना,शोहदों के हाथ से
रंग तुम लगने न देना,"महजबीं" पोशाक पर
#उर्मिला माधव....
14,3,2016

शाक़--- मुश्किल 
मुनक़्क़ीद---कद्रदान 
मुश्ताक़-----अभिलाषी,उत्सुक
मुग़न्नी----- गायक

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