लज्जित हूं
लज्जित हूँ मैं ,
मैं लज्जित हूँ,
तुम्हारे दर्प से,
खिल्ली उड़ाती हुई,
भंगिमाओं से,
भावनाओं पर,
ठेस पहुंचाते हुए
हठ से,
मैं लज्जित हूँ,
तुमको समझते हुए भी,
ना समझ कर,
मैं लज्जित हूँ,
आह भरती हुई,वाह पर,
मैं लज्जित हूँ,
तुम्हें,भीड़ के साथ ,
खड़ा देख कर,
हां मैं लज्जित हूँ,
तुम्हारी उन कुंठाओं से,
नहीं दिखाई देतीं,
जो तुम्हें स्वयम को ,
मैं पीड़ित हूँ,
पथिक----
तुम्हारे भटकाव से,
छलनाओं से दिग्भ्रमित,
पथिक,
मार्ग की बाधाएं,विषम हैं,
सीखना होगा,
स्वयम के पैरों से चलना,
ज़िंदाबाद के नारे,
देते हैं बढ़ावा
भटकाव को,
मैं लज्जित हूँ,
तुम्हारे अंधकार की भटकन से,
बहुत लज्जित हूँ,
तुम्हारे ओढ़े हुए,
दर्प से,
हां मैं लज्जित हूँ,
तुम्हारे,अहंकार से ..…
लज्जित हूँ मैं....
उर्मिला माधव,
2.11.2017
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