करते हैं हम
एक मतला दो शेर---
--------------------
बे-वज्ह इस जीस्त पर क्यूँ इस क़दर मरते हैं हम !!
मरके जीने के इलावा........और क्या करते हैं हम ??
चश्म-ए-गिरियाँ,टूटते दिल,और फ़क़त,तन्हाइयां,
दर्द पीने के इलावा..........और क्या करते हैं हम ??
चाक़ दामन,हाल खस्ता........और कुछ पैबंद बस ,
ज़ख्म सीने के इलावा.......और क्या करते हैं हम ??
उर्मिला माधव...
१९.११.२०१३.
Comments
Post a Comment