कूड़ा करकट -नज़्म
ये दुनियां कूड़ा करकट है,
तुम कूड़े हो,ये कूड़ा है,
वो कूड़ा है,इधर-उधर
भी सब कूड़ा है,
सिर्फ़ अकेले हम ही हैं जो
इस दुनियां में कूड़ा नईं हैं,
बकते हो तुम,तुम्हीं अकेले कूड़ा
नईं हो ?
सोच समझ कर बोल रहे हो,
या फ़िर सच सच बतला दो ना,
कुफ़्र झूठ का तौल रहे हो ?
सबसे पहले ख़ुद को देखो,
कूड़ा ही तुम बोल रहे हो,
कूड़ा ही तुम तौल रहे हो,
दुनियां भर को कूड़ा कहकर,
तुम अपना सच खोल रहे हो,
पहले तुम सच कहना सीखो,
इस दुनियां में रहना सीखो,
उर्मिला माधव
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