नज़्म देखा किये
दूर तक जाते हुए क़दमों को हम देखा किये,
दिल में कुछ चीखें उठीं पर लब तलक आईं नहीं,
बेवजह,बेसाख़्ता,बेइन्तिहा देखा किए,
तू न आएगा कभी अब लौट कर ऐ रहनुमाँ,
मुब्तिला-ए-गम थे हम बस जाने क्या देखा किए ..........
उर्मिला माधव..
दूर तक जाते हुए क़दमों को हम देखा किये,
दिल में कुछ चीखें उठीं पर लब तलक आईं नहीं,
बेवजह,बेसाख़्ता,बेइन्तिहा देखा किए,
तू न आएगा कभी अब लौट कर ऐ रहनुमाँ,
मुब्तिला-ए-गम थे हम बस जाने क्या देखा किए ..........
उर्मिला माधव..
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